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ग्रामीण मतदाताओं का दिल जीतने काे सीएम धामी का मास्टर स्ट्रोक, ये है 45 दिनों का फुल प्रूफ प्‍लान

deltin33 2025-12-18 18:07:21 views 1262
  

नये बजट से पहले सरकारी मशीनरी चली गांवों की ओर। आर्काइव



रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून । पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहाड़ों से लेकर मैदानों को ही नहीं नापा, साथ में जनता की नब्ज पर भी हाथ रखा है। मुख्यमंत्री के बाद अब सरकारी मशीनरी गांव-गांव चल पड़ी है। ‘जन-जन की सरकार, जन जन के द्वार’ के बहाने 45 दिनों तक गांवों व न्याय पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर ग्रामीण जनमानस का दिल जीतने की तैयारी है। नये बजट से पहले धामी सरकार ने सावधानी से यह मास्टर स्ट्रोक चला है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

बहुद्देश्यीय शिविरों में 23 विभाग समस्याओं से जूझ रहे आमजन को राहत दिलाएंगे, जबकि नये बजट में जन भावनाओं और आंकाक्षाओं को मूर्त देने के लिए ठोस कदम उठते दिखाई देंगे।

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव में सवा साल ही बचा है। इसके साथ ही सत्ता के गलियारों में चुनावी तैयारियों की धमक साफ सुनाई देने लगी है। वर्षाकाल निपटने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री धामी ने विकास कार्याें के साथ चुनावी एजेंडे को धार देने को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। प्रदेश स्तर पर लगातार सक्रियता के दौरान मिले फीडबैक के बाद जनभावनाओं को भांपकर अब धामी सरकार गांवों की ओर चल पड़ी है। पहली बार गांवों में बहुद्देश्यीय शिविरों का आयोजन बड़े और व्यापक अभियान के रूप में किया जा रहा है।

बुधवार से प्रारंभ यह अभियान 45 दिन तक चलेगा। 23 विभागों को यह जिम्मा दिया गया है कि जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाए। हर न्याय पंचायत में कल्याण योजनाओं का लाभ लेने से न तो कोई पात्र लाभार्थी छूटे और न ही उनकी समस्याओं के समाधान में हीलाहवाली होने पाए। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता का अंदाजा इससे लग सकता है कि बुधवार को पहले दिन ही उन्होंने इस अभियान
की समीक्षा की और जिलेवार शिविरों की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।

जनप्रतिनिधियों, संगठन और प्रशासन के समन्वय से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि आम जन की संतुष्टि ही सरकार का ध्येय है। दरअसल, प्रदेश में ग्रामीण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विधानसभा सीटों की संख्या भी अपेक्षाकृत अधिक है। गांव और ग्रामीण मतदाता सध गए तो धामी सरकार के लिए मिशन 2027 की राह आसान हो सकती है। विशेष यह भी यह अभियान तो शुरुआत है, नये बजट की पोटली में ग्रामीणों की आकांक्षाओं को धरातल पर उतारने के लिए ठोस पहल दिखाई देगी।

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