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बिजली कार्मिकों की CR लटकाने वाले रिपोर्टिंग अफसरों पर होगी कार्रवाई, लापरवाह अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि

Chikheang 2025-12-4 07:06:02 views 1238
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन तथा विद्युत वितरण निगमों में कार्यरत अभियंताओं से लेकर अन्य कार्मिकों की वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) लटकाए रखने वाले रिपोर्टिंग अफसरों (प्रतिवेदक अधिकारी) पर अब पावर कारपोरेशन प्रबंधन कड़ी कार्रवाई करेगा। रिपोर्टिंग अफसरों को सात दिसंबर की आधी रात तक सभी लंबित एसीआर को अग्रसारित करने की हिदायत दी गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इसमें लापरवाही बरतने वाले अफसरों को पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष खुद विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देंगे। कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल का कहना है कि समय पर एसीआर नहीं मिलने पर कार्मिकों को प्रोन्नति से लेकर अन्य कई लाभ तय अवधि में नहीं मिल पाते हैं। अध्यक्ष ने कार्मिकों को समय से सभी लाभ सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्टिंग अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सात दिसंबर तक सभी लंबित एसीआर को अग्रसारित करें।

रिपोर्टिंग अधिकारियों को खुद अध्यक्ष देंगे विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि

स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि तय अवधि में एसीआर का मूल्यांकन न करने वाले रिपोर्टिंग अधिकारियों को खुद अध्यक्ष विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देंगे। डिस्काम स्तर पर सर्वाधिक 1495 एसीआर पूर्वांचल डिस्काम में लंबित हैं। इसी तरह पश्चिमांचल में 1373, मध्यांचल में 1062, दक्षिणांचल में 978, केस्को में 137 व ट्रांसमिशन कारपोरेशन में 67 एसीआर लंबित हैं। गौरतलब है कि एसीआर को ईआरपी पर भरने के लिए 20 नवंबर तक का समय दिया गया था। पिछले दिनों समीक्षा में पाया गया कि ईआरपी पर मात्र 53 प्रतिशत गोपनीय आख्याएं ही बढ़ाई गई हैं।  

इस पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष ने सात दिसंबर तक लंबित एसीआर को अगले स्तर पर अग्रसारित करने के निर्देश दिए हैं। जिन कार्मिकों की एसीआर 20 नवंबर तक ईआरपी पर फारवर्ड होने के बाद अगले स्तर पर बढ़ाई गई है। निर्देश दिए गए हैं कि उन सभी एसीआर में संबंधित अधिकारी, कार्मिक द्वारा वर्ष 2024-25 में किए गए कार्यों से अतिरिक्त अन्य तथ्यों को भी संज्ञान में लेते हुए मूल्यांकन किया जाए।

डिस्काम स्तर पर लंबित एसीआर डिस्काम

- लंबित एसीआर (प्रतिशत में) पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम

- 50.3 प्रतिशत मध्यांचल विद्युत वितरण निगम  

- 45.3 प्रतिशत दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम  

- 47.9 प्रतिशत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम  

- 51.4 प्रतिशत केस्को  

- 39.6 प्रतिशत यूपी पावर ट्रांसमिशन निगम  

- 2.23 प्रतिशत
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