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जेपी इंफ्राटेक के पूर्व एमडी मनोज गौड़ की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ी, कोर्ट ने ईडी की दलीलें मानीं

deltin33 2025-12-4 04:37:09 views 948
  

जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के एमडी मनोज गौड़।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) मनोज गौड़ की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी गई है। विशेष न्यायाधीश धीरेंद्र राणा की अदालत ने ईडी की दलीलें सुनने के बाद मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार गौड़ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अब उनको ईडी 16 दिसंबर को कोर्ट में फिर से पेश करेगी। ईडी ने अदालत में न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग को लेकर दायर आवेदन देकर कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे की जांच के लिए आरोपित का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है। ईडी ने 13 नवंबर को ग्रेटर नोएडा के बिल्डर मनोज गौड़ को उनके प्रोजेक्ट्स में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था।
हजारों खरीददारों के साथ मनी लांड्रिंग से जुड़ा मामला

ईडी ने दलील दी कि मामला हजारों खरीददारों के साथ मनी लांड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि जेएएल और जेआइएल ने खरीददारों से लिए गए लगभग 14,599 करोड़ रुपए में से बड़ी राशि का निर्माण में उपयोग नहीं किया गया और फंड्स को समूह की विभिन्न संस्थाओं जैसे जेपी सेवा संस्थान, जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेज की ओर मोड़ दिया गया।

ईडी ने दलील दी कि कई अहम दस्तावेज अब भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं और फंड डायवर्जन के नेटवर्क, अन्य संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए जांच जारी रखना जरूरी है।
ईडी ने तर्क दिया कि मनोज गौर इन संस्थाओं में प्रमुख भूमिका में थे और फंड डायवर्जन की योजना व क्रियान्वयन में उनकी केंद्र में भूमिका सामने आई है।

मई 2025 में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में की गई रेड में एजेंसी ने बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकार्ड बरामद किए थे।
हिरासत बढ़ाए जाने का विरोध पर उचरा बचाव पक्ष

बचाव पक्ष ने हिरासत बढ़ाए जाने का विरोध करते हुए कहा तर्क दिया कि ईडी का ईसीआइआर 2018 का है, और सात वर्ष बाद की गई गिरफ्तारी अवैध है। अधिवक्ता ने दलील दी कि उनका मुवक्किल जांच में सहयोग करता रहा हैं, ईमेल के माध्यम से भी तारीख बदलने का अनुरोध भेजा था फिर भी ईडी ने उन्हें अचानक गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने दलील दी कि कंपनी 2017 में दिवालिया हो चुकी है, ऐसे में व्यक्तिगत गिरफ्तारी का औचित्य नहीं बनता। बचाव पक्ष ने मनोज गौड़ की स्वास्थ्य स्थिति का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि जब उनका मुवक्किल जांच में शामिल हो चुका है, तो ईडी को अब क्या पूछना है।
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