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फर्जी SC सर्टिफिकेट पर RIMS में एडमिशन लेने वाली छात्रा का नामांकन रद, JCECEB की कार्यप्रणाली पर सवाल

deltin33 2025-12-4 02:43:20 views 439
  

RIMS में एडमिशन लेने वाली छात्रा का नामांकन रद



जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की एमबीबीएस प्रथम वर्ष (सत्र 2025-26) की छात्रा काजल द्वारा फर्जी अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लेने का मामला सही पाए जाने के बाद रिम्स प्रबंधन ने सोमवार को उसका नामांकन रद कर दिया।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इससे पहले उसे 20 नवंबर को निलंबित किया जा चुका था। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में संभावित जालसाजी और किसी सक्रिय गिरोह की भूमिका पर भी संदेह गहरा गया है।
डीसी की रिपोर्ट के बाद तीन नोटिस, फिर भी नहीं दिया जवाब

रिम्स ने नामांकन लेने वाले सभी छात्रों के प्रमाणपत्र संबंधित जिलों के उपायुक्तों को सत्यापन के लिए भेजे थे। गिरिडीह उपायुक्त की ओर से काजल का प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की लिखित सूचना मिलने पर प्रबंधन ने उसे लगातार तीन नोटिस भेजे, लेकिन छात्रा की ओर से कोई जवाब नहीं आया।  

इसके बाद विधि सलाह लेकर उसे दोषी मानते हुए नामांकन रद कर दिया गया। साथ ही उसके कक्षा में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और रिम्स होस्टल से उसे निकालने का फरमान जारी कर दिया गया है।  

रिम्स डीन (छात्र कल्याण) डॉ. शिव प्रिये ने बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट विभागीय संयुक्त सचिव और जेसीईसीईबी को भेज दी गई है। साथ ही गिरिडीह डीसी से विधि-सम्मत कार्रवाई करने एवं जालसाजी में शामिल गिरोह की पहचान करने का अनुरोध किया गया है।
जेसीईसीईबी की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल

छात्रा ने झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (जेसीईसीईबी) के माध्यम से एससी श्रेणी में रैंक-01 पाकर एमबीबीएस सीट हासिल की थी। यह पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व हजारीबाग मेडिकल कालेज में भी ऐसा मामला उजागर हो चुका है।  

सूत्रों के अनुसार जालसाजी का अधिकांश खेल नामांकन के समय जमा किए जाने वाले प्रमाण पत्रों के दौरान होता है, जबकि कालेज स्तर पर सत्यापन के बाद ही धोखाधड़ी पकड़ में आती है। इससे जेसीईसीईबी की प्रक्रियाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
एफआईआर का फैसला प्रशासन पर, छात्रा फिर दे सकती है नीट

रिम्स प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ओर से प्राथमिकी दर्ज नहीं करेगा। फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाना और उसका उपयोग करना दंडनीय अपराध है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन चाहे तो एफआईआर दर्ज कर सकता है। फिलहाल विभागीय कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।  

वहीं रिम्स के अनुसार, छात्रा पर नीट की ओर से अभी कोई स्थायी रोक नहीं है, इसलिए वह सामान्य अभ्यर्थियों की तरह दोबारा परीक्षा दे सकती है। यदि आगे चलकर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ या नीट उसे फ्रॉड की श्रेणी में दंडित करता है, तभी स्थायी प्रतिबंध लग सकता है।  

दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि नीट फॉर्म में दर्ज श्रेणी और नामांकन के समय प्रस्तुत श्रेणी का मिलान अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि ऐसी जालसाजी दोबारा न हो।
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