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महिला कॉन्स्टेबल भर्ती में 1 cm कम हाइट की वजह से हो गई थी फेल, हाईकोर्ट पहुंचा मामला; अदालत ने दिया नियुक्ति का आदेश

Chikheang 2025-12-3 20:07:49 views 729
  

महिला कॉन्स्टेबल भर्ती में हाइट विवाद मामले में पीजीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने उम्मीदवार को नियुक्ति का आदेश दिया है। सांकेतिक तस्वीर



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में महिला कॉन्स्टेबल भर्ती के एक लंबे चले विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्णायक फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार की हाइट को लेकर संदेह हो और किसी सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई वैज्ञानिक माप उम्मीदवार के पक्ष में आती है, तो उसे नकारा नहीं जा सकता। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने हरियाणा सरकार के 20 फरवरी 2019 वाले उस आदेश को रद कर दिया है, जिसके कारण याची ललिता को केवल 1.1 सेंटीमीटर की कथित कमी के चलते भर्ती से बाहर कर दिया गया था। 2018 में जारी एक विज्ञापन के तहत महिला कॉन्स्टेबल पद के लिए फतेहाबाद निवासी ललिता ने सभी चरण लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अन्य परीक्षण सफलतापूर्वक पार कर लिए थे।

लेकिन 20 फरवरी 2019 को हुए फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट में उसकी हाइट 156.9 सेमी दर्ज कर दी गई, जबकि न्यूनतम मानक 158 सेमी था। ललिता का कहना था कि उसकी वास्तविक हाइट इससे अधिक है। उसने दो अस्पतालों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की, जिनमें उसकी हाइट 158 सेमी से ऊपर मापी गई थी, मगर भर्ती बोर्ड ने इसे स्वीकार नहीं किया।

ललिता ने इस माप को गलत बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की और हाईकोर्ट ने 10 मई 2019 को आदेश दिया कि उसकी हाइट पीजीआई , चंडीगढ़ में सेंसर मशीन से मापी जाए। पीजीआई के तीन विशेषज्ञ डाक्टरों की मेडिकल बोर्ड ने 28 मई 2019 को उसकी हाइट 158.1 सेमी दर्ज की, जो आवश्यक न्यूनतम हाइट से अधिक है।

कोर्ट ने इस रिपोर्ट को \“वैज्ञानिक, सटीक और पूर्णत विश्वसनीय\“ मानते हुए कहा कि देश के शीर्ष मेडिकल संस्थान के निष्कर्ष को अनदेखा नहीं किया जा सकता। राज्य की ओर से कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और याची ने मौके पर आपत्ति नहीं उठाई अगर पीजीआई की रिपोर्ट मानने से समस्याओं का अंबार खुलेगा।

परंतु कोर्ट ने यह साफ किया कि जब स्वयं कोर्ट के आदेश पर विशेषज्ञ बोर्ड ने हाइट निर्धारित मानक से ऊपर पाई, तब प्रशासन इसका लाभ देने से इनकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि 20 फरवरी 2019 का अयोग्यता आदेश रद किया जाता है व सरकार याची को चार सप्ताह के भीतर याची को नियुक्ति–पत्र जारी करे व नियुक्ति सामान्य मेडिकल परीक्षा के अधीन होगी। कोर्ट ने कहा कि सेवा लाभों के लिए जॉइनिंग की तारीख को ही नियुक्ति तिथि माना जाएगा।
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