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150 किलोग्राम वर्ग का स्वदेशी सुसाइड ड्रोन बनाएगा भारत, 900 किमी होगी रेंज

deltin33 2025-12-1 02:37:41 views 695
  

स्वदेशी सुसाइड ड्रोन बनाएगा भारत। (प्रतीकात्मक तस्वीर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर भारत अब 150 किलोग्राम वर्ग का स्वदेशी सुसाइड ड्रोन बनाने जा रहा है। यह दुश्मन के ठिकानों पर कहर बनकर टूटेगा।

150 किलोग्राम वर्ग के लोइटरिंग म्यूनिशन यूएवी (एलएम-यूएवी) के डिजाइन और निर्माण के लिए सोलर डिफेंस एंड एरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने बेंगलुरु में सीएसआइआर-नेशनल एरोनाटिकल लेबोरेटरीज (सीएसआइआर-एनएएल) के साथ रविवार को करार किया। यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआइआर द्वारा डिजाइन और विकास सहित रणनीतिक महत्व की परियोजना में शुरू से ही उद्योग भागीदार को शामिल करने की नई पहल और अनूठे दृष्टिकोण की सराहना की।

एसडीएएल ने कहा, यह करार तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को प्रदान करने की प्रतिबद्धता में मील का पत्थर है। एलएम-यूएवी हमारे दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिसमें उन्नत क्षमताओं को स्वदेशी सामग्री के साथ मिलाकर भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जाएगा।

एसडीएएल को सीएसआइआर द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से उद्योग भागीदार के रूप में चुना गया था। चयन प्रक्रिया सीटीसीसीबीएस (संयुक्त तकनीकी एवं वाणिज्यिक निविदा प्रणाली) के माध्यम से हुई। इसमें पांच कंपनियों ने हिस्सा लिया था।
विशेष प्रकार का ड्रोन होता है लोइटरिंग म्यूनिशन

लोइटरिंग म्यूनिशन मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) होता है, इसमें ड्रोन और मिसाइल की खूबियां होती हैं। इसे कामिकेज ड्रोन या सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है, क्योंकि यह लक्ष्य पर हमला करने के बाद खुद नष्ट हो जाता है। यह दुश्मन के क्षेत्र पर मंडरा कर लक्ष्य की पहचान कर सकता है और फिर जरूरत पड़ने पर स्मार्ट गाइडेड मिसाइल में बदल सकता है। इसमें विस्फोटक लोड करके उसे एक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
150 किलोग्राम वर्ग के एलएम-यूएवी की खूबियां

इसमें एनएएल द्वारा विकसित वैंकल इंजन लगा होगा। इसे एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए प्रमाणन मिल गया है। इसमें उन्नत पेलोड समेत उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा- इसकी रेंज 900 किमी होगी और छह से नौ घंटे तक पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकेगा।

बेहद कम रडार क्रास सेक्शन (आरसीएस) के साथ इसकी स्टेल्थ क्षमता उन्नत होगी, जिससे रडार से इसका पता लगाना बेहद मुश्किल होगा। इसे जीपीएस की मदद के बिना भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है जिससे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

इसे एआइ-से लैस ईओ-आइआर पेलोड से लैस किया जाएगा, जिससे यह रियल टाइम में खुफिया अभियान के लिए असाधारण तरीके से लक्ष्य की पहचान कर सकेगा।

(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)
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