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डिजिटल अरेस्ट कर लाखों ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़, नर्सिंग असिस्टेंट समेत तीन जालसाज गिरफ्तार

cy520520 2025-11-25 22:37:18 views 351
  



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह में शामिल नर्सिंग असिस्टेंट समेत तीन जालसाजों काे गिरफ्तार किया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा में हिसार के रहने वाले रवि, मंदीप और तुगलकाबाद एक्सटेंशन के कलीम के रूप में हुई है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।

उपायुक्त आदित्य गौतम के मुताबिक, ठगों ने एक मामले में एक 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला से साइकोलाॅजिकल दबाव, लाॅ एनफोर्समेंट एजेंसियों का रूप धारण कर डिजिटल अरेस्ट कर 49 लाख रुपये ठग लिए। वहीं, दूसरे मामले में 43 वर्षीय स्टेशनरी शाॅप के मालिक से क्रिप्टोकरेंसी इन्वेस्टमेंट के जरिये अधिक रिटर्न कमाने के बहाने 39.50 लाख रुपये की ठगी की।

पुलिस ने दोनों ही मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू की। टीम ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई, लेकिन उनके बारे में कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। इसके बाद टीम ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से तीनों आरोपियों को गुरुग्राम और हिसार से दबोच लिया।

आरोपियों की पहचान रवि, मंदीप और कलीम के रूप में हुई। आगे पुलिस को पता चला कि रवि नर्सिंग असिस्टेंट है। उसने बैंक में एक म्यूल अकाउंट (आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने बैंक अकाउंट) खोला और उसे ठगी गई रकम के कुछ प्रतिशत पर बेचा।

मंदीप तेज ध्वनि यंत्र बजाने का काम करता है और कलीम बढ़ई का काम करता है। उसने एक फर्म के नाम पर म्यूल अकाउंट खोला हुआ है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर गिराेह में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
इस तरह गिरोह लोगों को लगाता था चूना

गिरोह पीड़ितों को डराने के लिए फर्जी पुलिस अधिकारी और सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बन डिजिटल अरेस्ट करते थे। फिर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे।

इसके अलावा अधिक रिटर्न का वादा करके लोगों को लुभाने के लिए धोखाधड़ी वाले इन्वेस्टमेंट पोर्टल बनाए गए थे। कई लेयर वाले बैंक अकाउंट के जरिए पैसे लान्ड्र किए जाते थे और फिर एटीएम से पैसे निकाल लेते थे। गरीब और बेरोजगार युवाओं को म्यूल अकाउंट चलाने के लिए भर्ती किया गया था, जिससे क्राइम से कमाए गए पैसे को लाॅन्ड्रिंग में मदद मिलती थी।

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