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आतंकी धमाके के बाद 14वें दिन अमित शाह पहुंचे लालकिला, गुरु तेग बहादुर समागम में मत्था टेककर ली आशीर्वाद

deltin33 2025-11-25 05:06:02 views 524
  

लाल किला परिसर में गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस पर आयोजित समागम में गुरु ग्रंथ साहिब को नमन करते केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। जागरण



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके के 14वें दिन गृहमंत्री अमित शाह लालकिला पहुंचे। सोमवार को वह देर शाम लाल किला मैदान में चल रहे समागम में शिरकत की। आयोजन स्थल की व्यवस्था का जायजा लिया तथा विभिन्न राज्यों से आई संगत का स्वागत किया। गुरु ग्रंथ साहिब को मत्था टेककर आर्शीवाद लिया। श्रद्धालुओं से मुलाकात के दौरान समागम को धार्मिक आस्था व श्रद्धा के लिए अतुलनीय कहा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कई मंत्रियों ने टेका मत्था

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कपिल मिश्रा व सिख समाज के गणमान्य लोग व भारी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने गृह मंत्री को गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस पर आधारित पुस्तक भेंट की। इसके पहले 10 नवंबर को आतंकी हमले के कुछ घंटे बाद गृह मंत्री लाल किला के सामने नेताजी सुभाष मार्ग पहुए थे तथा घटनास्थल का जायजा लिया था।
आयोजन को लेकर संशय का था माहौल

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में डीएसजीएमसी के सहयोग से दिल्ली सरकार द्वारा इस विशाल समागम का आयोजन किया गया है, जो बुधवार तक चलेगा। जिसे लेकर लाल किला मैदान से लेकर पूरे चांदनी चौक क्षेत्र में भक्ति और अध्यात्म का संगम जैसा अद्भूत माहौल है। वैसे, चंद कदम की दूरी पर हुए आतंकी धमाके के बाद इस आयोजन को लेकर संशय का माहौल था।

गृहमंत्री के जाने के बाद संगत को संबोधित करते हुए खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उसे अपने शब्दों में बयां किया कि जब दिल्ली में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ तो हम सभी डर गए थे कि लाल किले पर इतना बड़ा आयोजन कैसे कर पाएंगे। तब अमित शाह ने जी उन्हें संबल दिया कि जितनी मर्जी संगत आए, चाक चौबंद व्यवस्था ऐसी रहेगी कि कोई पत्ता भी नहीं हिल पाएगा। संगत को कोई परेशानी नहीं आने देंगे।
संगत का स्वागत कर गुरु का आर्शीवाद लिया

गृहमंत्री का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि उन्होंने तभी कहा था कि खुद लालकिला में समागम आकर मत्था टेकुंगा और सारी व्यवस्था देखुंगा। आज गृहमंत्री समागम में शामिल हुए। व्यवस्था देखी और संगत का स्वागत कर गुरु का आर्शीवाद लिया।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धा से भरे संगत को संबोधित करते हुए आगे कहा कि जब हमने दिल्ली में इस समागम के आयोजन का विचार किया था तब नहीं सोचा था कि आप सबका इतना आर्शीवाद मिलेगा। गुरु साहब की इतनी कृपा इस रूप में होगी कि आपकी सेवा कर पाएंगे। आज भी लाखों की संख्या में संगत जुटी है।
बलिदान का उल्लेख किया

उन्होंने गुुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लाल किला, जिसने कभी गुरु साहिब की शहादत देखी, औरंगजेब का अत्याचार देखा तथा भाई सती दास जी, भाई मति दास जी और भाई दयाला जी की कुर्बानियां देखीं, आज वही लाल किला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शहादत को देश कभी भूला नहीं है और न कभी भूलने देगा।
समर्पण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का चलेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली सरकार ने पूरे वर्ष गुरु के शहादत, समर्पण और कुर्बानी का गुणगान करने तथा उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का निर्णय किया है। गुरु साहिब के उपदेशों और महान बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी। हम भी कोशिश करेंगे कि गुरु साहब के चरणों में इस माध्यम से अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर सकें।

उन्होंने समागम को सफल बनाने में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों को सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। इसके पूर्व सुबह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन व सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब पहुंचकर मत्था टेका था।
सीएम ने संगत की सेवा की, प्रसादा बनाई

सीएम रेखा गुप्ता मंगलवार को भी समागम में शिरकत की थी। इस मौके पर संगत की सेवा और लंगर में प्रसादा बनाई और लंगर में सेवा की। इस दौरान उन्होंने संगत से घुलमिलकर उनका हालचाल जाना। लोग उन्हें आयोजन के लिए धन्यवाद देते दिखे।
350 छात्रों का सामूहिक कीर्तन गान

इस दौरान समागम में गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल के 350 विद्यार्थियों ने एक साथ सामूहिक कीर्तन कर एक नया इतिहास रचा। ये विद्यार्थी पिछले कई दिनों से सामूहिक कीर्तन के लिए विशेष अभ्यास कर रहे थे। इस मनमोहक दृश्य के साक्षी हजारों की संख्या में उपस्थित संगत बने और सभी ने कीर्तन का आनंद लिया।

यह भी पढ़ें- इतिहास का इंसाफ, सिख गुरुओं के वंदन में दंडवत लाल किला; गूंजती गुरुवाणी में आस्था का दिख रहा समागम
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