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संभल में 12 मकानों पर खाली करने के ल‍िए लगाया गया लाल न‍िशान, 90 बीघा सरकारी जमीन पर था अवैध कब्जा

deltin33 2025-11-21 23:07:24 views 448
  



संवाद सहयोगी, संभल। तहसील क्षेत्र के गांव हसनपुर मुंजब्ता में 90 बीघा सरकारी भूमि को चिन्हित करने की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। राजस्व विभाग टीम शुक्रवार को भी गांव पहुंची और खाद के गड्ढे की जमीन पर बने 12 अवैध मकानों को चिन्हित करके उनपर निशान लगाए हैं। तहसीलदार ने कब्जाधारियों को जल्द ही मकानों को खाली करने के निर्देश दिए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  

दरअसल, राष्ट्रीय योगी किसान बिग्रेड के ब्रज प्रांत अध्यक्ष गोपीचंद प्रजापति ने 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में शिकायत की थी कि हसनपुर मुंजब्ता में ग्राम समाज भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पैमाइश शुरू कराई और कब्जा हटाने के लिए 13 सदस्यीय विशेष टीम गठित की। गुरुवार को नायब तहसीलदार अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम गांव पहुंची थी और चिन्हित स्थलों पर कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की।

टीम ने शुरुआत में 12 बीघा सरकारी भूमि पर उगाई गई आलू की फसल को ट्रैक्टर-हैरो चलवाकर पूरी तरह नष्ट कराया था। यह अवैध खेती लंबे समय से ग्राम समाज एवं अन्य सरकारी भूमि पर की जा रही थी। वहीं 10 बीघा से अधिक क्षेत्र में फैले तीन तालाबों को भी चिन्हित किया गया है।

इसके अलावा खाद के गड्ढों पर बने 12 और मकानों को भी राजस्व विभाग की टीम ने चिन्हित कर उनपर निशान लगाए हैं। साथ ही कब्जाधारियों को मकान खाली कराने के लिए नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है। राजस्व विभाग की टीम में राजस्व निरीक्षक उरमान सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल हेमंत कुमार, मुकेश शर्मा, दिगपाल सिंह, हिमांशु सिंह, सरजीत सिंह, जीतपाल सिंह, शाहबाज आलम, राजीव कुमार, स्पर्श गुप्ता, ज्ञानेश कुमार, एंटोनी आदि लेखपाल रहे।
तहसील पहुंचे ग्रामीण, बोले- 40 वर्ष पहले आवंटित किए गए थे पट्टे


हसनपुर मुंजब्ता गांव के दर्जनों ग्रामीण शुक्रवार को तहसील पहुंचे और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 40 वर्ष पहले उन्हें जिस भूमि पर पट्टे आवंटित किए गए थे, अब उसी पर राजनीति के चलते कार्रवाई की जा रही है और दलित समाज के लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।

गांव निवासी रविशंकर भारती ने एसडीएम को शिकायती पत्र सौंपकर बताया कि आवासीय पट्टे विभाग द्वारा वर्ष 1965, 1973, 1988 व 1990 में नसबंदी और भूमिहीनों को आवंटित किए गए थे। आरोप है कि अब ग्राम स्तर की राजनीतिक खींचतान के कारण दलित बस्ती के लोगों को पट्टों से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में पहले राशन की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति की दुकान समूह के किसी अन्य व्यक्ति को दिए जाने के बाद दुश्मनी के कारण यह कार्रवाई हो रही है। पट्टा धारक भूमिहीन हैं, इसलिए उन्हें सुना जाए और बेवजह बेदखल न किया जाए। इसमें लक्ष्मी, रामवती, जवित्री, मालती, मोरकली, अंगूरी, इंद्रवती, प्रताप सिंह, धर्मपाल सिंह, जयप्रकाश, किशनपाल, श्रीराम, ओमपाल, खेमपाल सिंह, सोनू, पप्पू आदि मौजूद रहे।
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