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Sanjay Singh Tiger: जनसेवा के लिए नहीं की शादी, लिट्टी-चोखा के हैं शौकीन; आरा के संजय पहली बार बने मंत्री

Chikheang 2025-11-20 17:38:07 views 764
  

संजय सिंह टाइगर बने मंत्री। (फोटो जागरण)



संवाद सूत्र, बिहिया (आरा)। पटना के गांधी मैदान में गुरुवार को मंत्री पद की शपथ लेने वाले आरा के विधायक संजय सिंह दूसरी बार विधानसभा में पहुंचे हैं।

इससे 2010 में भोजपुर के संदेश विधनसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। भाजपा में प्रखर वक्ता और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखने वाले संजय सिंह टाइगर ने संघ के माध्यम से राजनीति में इंट्री ली।

बड़े भाई स्व.धर्मपाल सिंह ने 1990 से 2000 तक जनता पार्टी(जेपी) और जनता दल से शाहपुर के विधायक रहे। संजय बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित थे और उससे जुड़कर राष्ट्र सेवा में जुट गए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन के लिए उन्होंने विवाह नहीं किया। संघ में ओजस्वी संवाद के लिए \“टाइगर\“ उपनाम से नवाजे गए।

भोजपुर के बिहिया प्रखंड अंतर्गत अमराई नवादा के निवासी 50 साल के संजय टाइगर ने पटना के एएन कॉलेज से स्नातक, एलएलबी और परा स्नातक की डिग्री हासिल की है। चार भाइयों में सबसे छोटे संजय के पिता बिहार महालेखापाल के कार्यलय में कार्यरत थे।
जीवन में सादगी और सेवा को चुना

गांव में रह रहे बड़े भाई कृष्णा कुमार सिंह बताते हैं कि संपन्न परिवार और राजनीतिक विरासत होते हुए भी संजय ने अपने जीवन में सादगी और सेवा को चुना।

उन्होंने बताया कि वे आज भी शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं, दरी पर सोते हैं और खाने में लिट्टी-चोखा सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। बड़े भाई ने बताया कि पटना में पढ़ाई करते हुए संघ की ओर उनका झुकाव हुआ। इसके बाद वे शत्रुघ्न सिन्हा फैन्स क्लब से जुड़े और पार्टी एवं सामाजिक कार्यों में अपनी पहचान बनाई।

राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा के दौरान कृष्णा कुमार सिंह बताते हैं—हमारे पिता स्व. माधव सिंह एजी कार्यालय में वरीय लेखा पदाधिकारी थे। हम चार भाई थे—पहले धर्मपाल सिंह (पूर्व विधायक), फिर मैं, तीसरे नंबर पर विजय कुमार सिंह और सबसे छोटे संजय।

उन्होंने बताया कि संजय सिंह टाइगर का जन्म 1974 में हुआ था। बचपन से ही वे अपने भाइयों से अलग स्वभाव के थे। संकोची, विचारवान और राष्ट्रभक्ति से भरे। युवावस्था की आम कमजोरियों से दूर रहकर वे हमेशा समाज के कमजोर तबके की मदद करने में आगे रहते थे।

उन्होंने कभी पद या टिकट के लिए लॉबी नहीं की। पार्टी ने उनकी निष्ठा और काबिलियत को समझा और 2010 में भोजपुर जिले की संदेश विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। पहली बार में ही संजय सिंह टाइगर ने शानदार जीत दर्ज की और विधायक बने। उनके कार्यकाल की ईमानदारी और सादगी के किस्से आज भी इलाके में सुनाए जाते हैं।

कृष्णा कुमार सिंह बताते हैं कि संजय आज भी शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं, दरी पर सोते हैं और खाने में लिट्टी-चोखा सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं।

राजनीतिक विरासत जरूर थी, पर उन्होंने कभी इसका फायदा नहीं उठाया। बड़े भाई धर्मपाल सिंह भी सामाजिक कार्यों में अग्रणी थे। उन्होंने पहली बार 1985 में शाहपुर से चुनाव लड़ा था, जब उसी क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज बिंदेश्वरी दुबे भी मैदान में थे। 1990 में जनता जेपी से लड़े और शिवानंद तिवारी जैसे दिग्गज को हराया। 1995 में दूसरी बार विधायक बने।
टाइगर उपनाम की कहानी

इसके संबंध में ग्रामीण सुरेश सिंह बताते है कि संदेश से चुनाव लड़ने के दौरान संजय सिंह नाम के और उम्मीदवार होने के कारण इन्होंने चुनाव आयोग या प्रशसन से आग्रह कर अपने नाम मे उपनाम टाइगर जुड़वाया था ताकि कन्फ्यूजन न हो।
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