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RTE उल्लंघन पर 2808 स्कूलों का MIS पोर्टल सीज, ऑनलाइन एडमिशन ठप; हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन

LHC0088 2025-12-1 13:08:08 views 676
  

हरियाणा सरकार ने आरटीई के तहत सीटें न दिखाने वाले 2808 प्राइवेट स्कूलों के एमआइएस पोर्टल बंद कर दिए (प्रतीकात्मक फोटो)



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। राइट टू एजुकेशन (आरटीई) की सीटें पोर्टल पर नहीं दिखाने वाले प्राइवेट स्कूलों के प्रति हरियाणा सरकार सख्त हो गई है। राज्य सरकार ने पिछले आठ माह के भीतर ऐसे 2808 प्राइवेट स्कूलों के एमआइएस पोर्टल बंद कर दिए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस वजह से जहां बच्चों के आनलाइन दाखिले नहीं हो पा रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी चाहते हैं कि प्राइवेट स्कूलों को अपनी मनमानी छोड़कर गरीब बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिले देने चाहिएं और यह तभी संभव है, जब वे पोर्टल पर आरटीआई के अंतर्गत खाली सीटें दिखाएंगे।  

प्राइवेट स्कूल संघ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की इस कार्यवाही का प्रबल विरोध किया है। संघ ने कहा है कि अधिकतर स्कूलों ने आरटीई की सीटें दिखाने के बाद जानकारी के अभाव में फाइनल सबमिट नहीं किया था।

शिक्षा विभाग ने इसकी कोई सूचना संबंधित स्कूल को टाइम रहते नहीं दी और मंथली फीस के आधार पर 30 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भरने का नोटिस स्कूलों को दे दिया।

संघ ने कहा कि आठ माह से बंद पड़े 2808 स्कूलों के एमआइएस पोर्टल खोलने समेत सात सूत्रीय मुख्य मांगों का एक पत्र मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को लिखकर इनका समाधान करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।  

प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में कहा कि डाक्यूमेंट आनलाइन करते समय स्कूल से गलती होने पर जुर्माना लगाने की बजाय पहले स्कूल को मेल या फोन के माध्यम से सूचित किया जाना चाहिए था।

ऐसे में अब 2808 स्कूलों का पोर्टल बिना जुर्माना लिए खोला जाए, क्योंकि इनको आरटीई की सीटें फाइनल सबमिट नहीं होने की कोई सूचना शिक्षा विभाग द्वारा नहीं दी गई।

हजारों स्कूल सोसायटियों का जुर्माना माफी का पत्र भी अभी तक जारी नहीं हुआ है, जिसका आश्वासन स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 17 अक्टूबर को सीएम आवास पर प्रतिनिधिमंडल को दिया था।

फेडरेशन आफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी गैर मान्यता विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार कानून 2011 के अपेंडिक्स फर्स्ट (वन रूम वन क्लास) के अनुसार मान्यता तथा 10 अप्रैल 2007 से पहले स्थापित सभी अस्थाई व अनुमति प्राप्त स्कूलों को बीजेपी के 2014 के चुनाव घोषणा पत्र के अनुसार एकमुश्त स्थाई मान्यता प्रदान की जाए।

उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों का करोड़ों रुपया सरकार की तरफ बकाया है, उसे देने की तरफ शिक्षा विभाग का कोई ध्यान नहीं है।  

प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू के अनुसार सरकार को चाहिये कि वह फायर सेफ्टी की तरह हाइजीनिक सर्टिफिकेट की वैधता भी तीन वर्ष करे।

स्कूली बसों की आयु सीमा बढ़ाई जाए तथा स्कूल बस टैक्स, प्रापर्टी टैक्स व अन्य सभी प्रकार के टैक्स प्राइवेट स्कूलों के समाप्त किए जाने चाहिएं। उन्होंने कहा कि महापुरूषों की जयंती के दिन छुट्टी करने या नहीं करने का अधिकार स्कूलों को दिया जाए ताकि जयंती के दिन स्कूल में कार्यक्रम कर सकें।
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