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मुरादाबाद मझोला मंडी में आढ़तियों ने दी जगह खाली करने की हामी, बनेंगी नई दुकानें, वैकल्पिक स्थान

Chikheang 2025-11-17 21:07:23 views 1254
  

फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मंडी प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण कृषि उत्पादन मंडी समिति मझोला की तस्वीर आज भी बदहाल है। कीचड़, गंदगी, टूटी सड़कें और जाम से हर दिन आढ़ती, किसान और आम नागरिक दो-चार हो रहे हैं। मंडी के पुनर्विकास की 5.45 करोड़ की परियोजना के तहत बनने वाली 38 नई दुकानें बनाए जाने के लिए आढ़ती स्थान खाली करने के लिए सहमत तो हो गए हैं लेकिन, उनकी शर्त यह है कि उन्हें कारोबार करने के लिए वैकल्पिक स्थान दिया जाए। इस पर अभी वार्ता होनी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मंडी प्रशासन के आढ़तियों को स्थान देने के बाद ही नई दुकानें का निर्माण शुरू होगा। मंडी निदेशालय ने 38 नई दुकानें बनाने के लिए ठेकेदार के नाम पर मुहर लगा दी है, यानी दुकानों के निर्माण में अब कोई तकनीकी बाधा नहीं बची है हालांकि यह दुकानें यहां के आढ़तियों के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। रविवार को फल सब्जी विक्रेता कल्याण समिति के आढ़तियों की बैठक के बाद नई दुकानें बनाए जाने के लिए आढ़तियों को हटाने का विवाद भी अब लगभग खत्म हो गया है।

आढ़तियों ने मंडी प्रशासन को स्पष्ट कहा है कि वे हटने को तैयार हैं, बस उन्हें वैकल्पिक जगह तय करके दे दी जाए। फल-सब्जी विक्रेता कल्याण समिति की बैठक में यह सहमति बनी। सोमवार–मंगलवार को प्रशासन और आढ़तियों की औपचारिक वार्ता के बाद निर्माण शुरू हो सकता है। फल-सब्जी विक्रेता कल्याण समिति की बैठक में आढ़तियों ने कहा कि इतने बड़े परिसर के लिए 38 नई दुकानें ऊंट के मुंह में जीरा की तरह ही है, लेकिन शुरुआत स्वागत योग्य है।

हम निर्माण के विरोधी नहीं हैं। दुकानें जहां बननी हैं, हम हट जाएंगे। पर हमें ऐसी जगह मिलनी चाहिए, जहां कारोबार प्रभावित न हो। बैठक में समिति के अध्यक्ष प्रीतम सैनी के अलावा राजकुमार सैनी, राहुल शंखधार, हरपाल सैनी, मोनू सैनी, रफत, सुनील कुमार व चंद्रपाल सैनी सहित सभी पदाधिकारियों ने अपनी राय रखी।

समिति के प्रवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि हम विकास चाहते हैं, लेकिन जब तक हमें व्यवस्थित ढंग से व्यापार की जगह नहीं मिलेगी, रोज-रोज विवाद खड़ा होगा। मंगलवार को जिलाधिकारी से मिलकर औपचारिक मांग रखेंगे। लेकिन सवाल वही, जो 40 साल से मंडी पर भारी है। दुकानें तो बन जाएंगी, पर सफाई, जलनिकासी और व्यवस्था कब सुधरेगी? चार दशक पुरानी मंडी की बदहाली जस की तस है।

258 दुकानों पर 550 आढ़तियों के पास लाइसेंस है। करीब 40 वर्ष पहले बनी मझोला कृषि उत्पादन मंडी समिति की हालत बदहाल ही रही। नतीजा जहां-तहां कब्जे, अस्थायी टीनशेड, झगड़े और अव्यवस्था ही है। बरसात में मंडी तालाब में बदल जाती है, ट्रालियां सड़क किनारे खड़ी होने से जाम लगता है और किसान उपज की बोली नालों वाली सड़क पर बैठकर लगवाते हैं। पिछले दस वर्षों में जितना भी पैसा विकास के नाम पर आया, उसका फील्ड इम्पैक्ट नदारद है।
5.45 करोड़ की परियोजना को निदेशालय से मिली हरीझंडी

शासन ने दो महीने पहले मंडी के पुनर्विकास के लिए 5.45 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति दी थी। सभी निविदाएं पूरी कर ली गई थीं। चार ठेकेदारों ने आवेदन किया था, एक का चयन भी हुआ, पर मामला निदेशालय में अटका हुआ था। अब निदेशालय ने अनुमोदन दे दिया है, जिसके बाद मंडी समिति ने सर्वे, मार्किंग और साइट क्लियरेंस की गति बढ़ा दी है। नई दुकानें बनाए जाने का काम शुरू करना भी इसी का हिस्सा है।
इस तरह से खर्च होगी धनराशि
सब्जी मंडी परिसर में 28 ‘ब’ श्रेणी की दुकानें 2.46 करोड़
फल मंडी में 10 दुकानें 88 लाख
फल मंडी में 12गुणा 60 मीटर छायादार नीलामी चबूतरा 63.24 लाख
दुकानों के सामने सीसी रोड, इंटरलाकिंग 41.01 लाख
ड्रेनेज, रोड व अन्य कार्य 82.50 लाख


  


निदेशालय से ठेकेदार के नाम पर अनुमोदन मिल चुका है। निर्माण में अब कोई तकनीकी अड़चन नहीं है। आढ़तियों के साथ अंतिम वार्ता होगी। जिन्हें हटना है, उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था देने पर विचार हो रहा है। मंडी के पुनर्विकास को शासन ने प्राथमिकता दी है, इसलिए अब कार्य जल्द शुरू होगा।

- विनय पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट




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