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वैश्विक संकट के बीच पीएम मोदी की अपील, बोले- ...

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हैदराबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में आयोजित भाजपा की एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए देशवासियों से ऊर्जा बचाने और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्ध और वैश्विक तनाव का असर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे भारत जैसे देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह ईंधन की बचत करे और देशहित में कुछ जरूरी संकल्प ले।





ఈ ప్రపంచ సంక్షోభ సమయంలో, మన బాధ్యతలకే అత్యంత ప్రాధాన్యత ఇస్తూ కొన్ని సంకల్పాలు చేసుకుని, వాటిని ఎట్టి పరిస్థితుల్లోనూ నెరవేర్చాలి. ఈ సందర్భంలో నాకు ఒక ప్రత్యేక విజ్ఞప్తి ఉంది… pic.twitter.com/Ktp0I10Jvm
— Narendra Modi (@narendramodi) May 10, 2026


पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने की सलाह

पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन शहरों में मेट्रो सुविधा उपलब्ध है, वहां लोगों को निजी वाहनों की जगह मेट्रो का अधिक उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कारपूलिंग को भी बढ़ावा देने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर एक ही दिशा में जाने वाले लोग साथ सफर करें तो ईंधन की खपत कम होगी और ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। उन्होंने “वर्क फ्रॉम होम” जैसे विकल्पों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां इस व्यवस्था को अपनाकर ईंधन की बचत की जा सकती है।





‘युद्ध के समय लोग सोना दान करते थे’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि पुराने समय में जब देश कठिन परिस्थितियों से गुजरता था या युद्ध होता था, तब लोग देशहित में अपना सोना दान कर देते थे। उन्होंने कहा कि आज किसी से सोना दान करने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर लोग अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें तो इससे देश की विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो सकती है। पीएम मोदी के मुताबिक, भारत में बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में सोने की खरीद कम होने से अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।





खाद्य तेल की खपत घटाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने खाने के तेल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत खाद्य तेल का भी बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल थोड़ा कम कर दे, तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी। प्रधानमंत्री ने इसे स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद कदम बताया।





प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह

पीएम मोदी ने किसानों और कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि देश को रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ऐसा लक्ष्य तय करना चाहिए जिसमें रासायनिक खाद की खपत को धीरे-धीरे आधा किया जा सके। इससे खेती की लागत घटेगी, जमीन की गुणवत्ता बेहतर होगी और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य की जरूरत है और इससे देश को आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलेगी।


विदेश यात्राएं टालने की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से फिलहाल अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि शादियों, छुट्टियों या अन्य निजी कारणों से होने वाली विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालना देशहित में हो सकता है। पीएम मोदी के अनुसार, इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।


वैश्विक संकट का भारत पर असर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल और गैस की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन ऐसे समय में देशवासियों का सहयोग बेहद जरूरी है। यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाएं तो इसका बड़ा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


‘देशहित में मिलकर लेना होगा संकल्प’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समय केवल सरकार के प्रयासों का नहीं बल्कि जनभागीदारी का भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा बचत, खर्च में संयम और आत्मनिर्भरता जैसे कदमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि देश ने पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना एकजुट होकर किया है और इस बार भी सामूहिक प्रयासों से चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी उनकी अपीलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।






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