मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है। इस तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों को शुरुआती कारोबार में ही करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
लाल निशान में खुला शेयर बाजार
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से करीब 944 अंक नीचे खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में लगभग 275 अंक तक फिसल गया। सुबह करीब 9 बजकर 54 मिनट पर सेंसेक्स 1058 अंक टूटकर 76,269.42 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बना रहा। गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भी तेजी से घटा, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी दर्ज की गई।
निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का सबसे ज्यादा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। शुरुआती कारोबार के दौरान ही बीएसई का मार्केट कैप कई लाख करोड़ रुपये घट गया। विश्लेषकों के मुताबिक, केवल कुछ घंटों में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार में घबराहट का माहौल देखने को मिला और अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। विशेष रूप से बैंकिंग, ऑटो, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक झटके में 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। सोमवार को भी कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यही कारण है कि ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
पीएम मोदी की अपील का भी दिखा असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का भी निवेशकों की भावना पर असर पड़ा है। पीएम मोदी ने रविवार को देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, सोना खरीदने से बचने और ऊर्जा खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत पर वैश्विक ऊर्जा संकट का असर पड़ रहा है और लोगों को संयम बरतना चाहिए। पीएम मोदी ने मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के ज्यादा इस्तेमाल पर भी जोर दिया था। विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की इस अपील को बाजार ने वैश्विक आर्थिक संकट की गंभीरता के संकेत के रूप में लिया, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी।
क्यों बढ़ा बाजार में डर?
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई वजहें एक साथ काम करती दिखाई दीं। सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने को लेकर रही। फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत पटरी से उतरने के बाद अमेरिका ईरान के खिलाफ और आक्रामक रुख अपना सकता है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के बचे हुए संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण को लेकर गंभीर है। इससे निवेशकों को आशंका है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष और बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा।
महंगाई बढ़ने का डर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। इससे बाजार में निवेशकों की चिंता और गहरी हो सकती है।
बनी रह सकती है अस्थिरता
विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता और तेल बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि इक्विटी बाजारों में दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

Editorial Team
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