नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को बताया कि 41 बायोगैस सिलेंडर भरने और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 14 प्लांट्स को लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है।
एक आधिकारिक बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) स्टेशन के लिए कुल 467 आवेदन मिले थे, जिन्हें 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच प्राथमिकता के आधार पर निपटाया गया।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इन 467 मामलों में से 157 को अंतिम लाइसेंस मिला, जबकि 38 मामलों में नए सीएनजी/सीबीजी स्टेशनों के निर्माण के लिए पूर्व मंजूरी दी गई।
पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने मौजूदा संकट के दौरान ईंधन और गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई सुरक्षा और सहायक कदम उठाए हैं।
सुपीरियर केरोसीन ऑयल (एसकेओ) के अस्थायी भंडारण में छूट दी गई है, जिससे 2,500 लीटर तक स्टोरेज की अनुमति मिली है और एक बार के लिए 5,000 लीटर तक की छूट दी गई है, ताकि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के तहत अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति जारी रहे।
मंत्रालय ने बताया कि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 18 मार्च को अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। साथ ही, एलएनजी को क्रायोजेनिक सिलेंडर में भरने की अनुमति देने के दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे ईंधन आपूर्ति को और लचीला बनाया जा सके।
पीईएसओ ने 20 मार्च को निर्देश जारी किए कि सीएनजी स्टेशनों और डिकंप्रेशन यूनिट्स से जुड़े आवेदनों को 10 दिनों के भीतर निपटाया जाए, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो सके।
जल्द आपूर्ति की समस्या को दूर करने के लिए 14 मार्च को पोरबंदर जेट्टी पर एलपीजी उतारने की अनुमति भी दी गई।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1 अप्रैल 2026 को पीईएसओ की वेबसाइट पर पीडीएस केरोसीन और डीजल सप्लाई के लिए मंजूर कंटेनर निर्माताओं और उनकी क्षमता की सूची जारी की गई।
इसके अलावा, 1 अप्रैल को सीएनजी/सीबीजी कंप्रेसर के लिए मंजूरी की प्रक्रिया में 6 महीने की अस्थायी छूट दी गई, ताकि नए स्टेशनों को जल्दी शुरू किया जा सके।
साथ ही, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) भी औद्योगिक गतिविधियों को जारी रखने, सप्लाई चेन को स्थिर रखने और पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन देने के लिए कई कदम उठा रहा है।
इन उपायों का उद्देश्य ईंधन और जरूरी संसाधनों की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना और उद्योगों को आ रही समस्याओं को कम करना है।

Deshbandhu
Science & Technolegybusiness newsdelhi news
Next Story |