जागरण संवाददाता, रायबरेली। एम्स स्थापना की घोषणा 2007 और भूमि मिलने की प्रक्रिया 2013 में शुरू हो गई थी, लेकिन एम्स को जितनी भूमि मिलनी थी, वह अभी पूरी नहीं मिल सकी है।
एम्स को शेष बची भूमि दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रक्रिया तेज कर दी है। दो ग्राम पंचायतों के करीब 35 किसानों से भूमि ली जाएगी, इसके लिए अधिकारियों ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को गजट कराने के लिए पत्र भेजा है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि एम्स को सौंपी जाएगी।
एम्स स्थापना के लिए 147.2 एकड़ भूमि दिए जाने का प्रस्ताव बना था। इसमें प्रदेश सरकार ने चीनी मिल की 97.35 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये में एम्स को दी गई थी। उसके बाद द्वितीय फेज में 49.85 एकड़ भूमि किसानों से अधिग्रहित करनी थी।
इसमें से करीब 43 एकड़ भूमि का अधिग्रहण हो चुका था और 2021 में भूमि एम्स को मिल चुकी है। इसी में 6.5 एकड़ भूमि अभी भी शेष बची है, जो एम्स को मिलनी है। भूमि ग्राम पंचायत दरियापुर व सुल्तानपुर आइमा के 35 किसानाें की है। जिला प्रशासन ने इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब पांच साल का अंतराल हो गया, इस नाते भूमि का दोबारा आंकलन कराया गया है। बताते हैं कि किसी भूमि स्वामी के विदेश में होने और भाई-भाई में बंटवारे का मुकदमा होने के कारण भूमि अधिग्रहण में देरी हुई है।
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को भूमि के गजट की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पत्र भेजा गया है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपत्तियां मांगी जाएंगी।
निर्धारित समयावधि 60 दिनों में आपत्तियों का निस्तारण कराकर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके बाद भूमि महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एम्स को ट्रांसफर करेंगे। फिलहाल, जल्द ही भूमि एम्स को मिलने की उम्मीद जगी है।
भूमि के गजट के लिए शासन से पत्राचार किया गया है, गजट होने के बाद आपत्तियां ली जाएंगी, उसके बाद भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।
विशाल यादव, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, रायबरेली  |