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गांव में ही रोजगार का नया मॉडल, मुजफ्फरपुर की पंचायतों में खुलेंगे सुधा होल-डे-मिल्क पार्लर

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Rural Employment Scheme: ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में जिले में एक नई पहल की जा रही है। मुजफ्फरपुर जिले के चार प्रखंडों की नौ पंचायतों में पंचायत सरकार भवन के साथ-साथ सुधा डेयरी के होल-डे-मिल्क पार्लर खोले जाएंगे।

इससे एक ओर जहां गांवों में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर दुग्ध उत्पाद सीधे ग्रामीणों तक पहुंच सकेंगे। विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता ने सभी भवनों का प्राक्कलन तैयार कर अधीक्षण अभियंता को भेज दिया है।

तकनीकी स्वीकृति के लिए अनुरोध किया गया है। इन पंचायत सरकार भवनों और सुधा होल-डे-मिल्क पार्लर के निर्माण पर कुल मिलाकर 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है।

दरअसल, सरकार की योजना के तहत निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन परिसरों में ही सुधा होल-डे-मिल्क पार्लर खोले जाने हैं, ताकि गांव-गांव तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

इसी उद्देश्य से पहले ही पंचायत सरकार भवन परिसरों को इसके लिए उपयुक्त स्थल के रूप में चुना गया था। अब उसी निर्देश के आलोक में नौ पंचायतों में निर्माण के लिए स्थल चिह्नित कर लिया गया है।

चार प्रखंडों की जिन पंचायतों में यह निर्माण प्रस्तावित है, वहां अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई है। मड़वन प्रखंड की जीयनखुर्द पंचायत में लगभग दो करोड़ 28 लाख 45 हजार रुपये और पकड़ी पकोही पंचायत में करीब दो करोड़ 28 लाख आठ हजार रुपये खर्च होंगे।

सरैया प्रखंड की राजारामपुर पंचायत में दो करोड़ 28 लाख 26 हजार रुपये तथा रुपौली पंचायत में करीब दो करोड़ 28 लाख 65 हजार रुपये की लागत से भवन और पार्लर का निर्माण होगा।

इसी तरह पारू प्रखंड की खुटाही पंचायत में दो करोड़ 30 लाख 67 हजार रुपये, चक्की सोहागपुर पंचायत में दो करोड़ 29 लाख 29 हजार रुपये और कोइरिया निजामत पंचायत में करीब दो करोड़ 30 लाख 95 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

साहेबगंज प्रखंड की वासुदेवपुर सराय पंचायत में लगभग दो करोड़ 33 लाख 37 हजार रुपये और हलीमपुर पंचायत में करीब दो करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपये की राशि से निर्माण प्रस्तावित है।

अधिकारियों के अनुसार, इन होल-डे-मिल्क पार्लरों के खुलने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में सुधा के दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पंचायत सरकार भवन भी बहुउद्देशीय केंद्र के रूप में विकसित होंगे।   
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