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आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज़ हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर उम्मीदवारों की सूची को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। ज़्यादातर सीटों पर पार्टी पुराने चेहरों पर ही भरोसा बनाए रखने के मूड में है।
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी लेंगे। फिलहाल कोलकाता को लेकर एक शॉर्ट लिस्ट तैयार की जा रही है, जिसमें ज़्यादातर मौजूदा विधायकों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
मानिकतला सीट पर सुप्ती पांडे के दोबारा मैदान में उतरने की चर्चा है। उन्होंने 2024 के उपचुनाव में भाजपा के कल्याण चौबे को भारी मतों के अंतर से हराया था। बता दे कि यह उपचुनाव पूर्व विधायक साधन पांडे के निधन के बाद खाली हुई सीट के लिए आयोजित किया गया था।
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वहीं, बेहाला ईस्ट और बेहाला वेस्ट को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं। पार्थ चटर्जी 2001 से ईस्ट में लगातार जीतते आ रहे हैं। पिछली बार उन्होंने भाजपा की श्राबंती चटर्जी को भारी अंतर के वोटों से हराया था। वहीं शोभन चटर्जी की पार्टी में वापसी के बाद माना जा रहा है कि वे सीधे बेहाला से न लड़कर उत्तर कोलकाता की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं या फिर चुनाव के बाद उन्हें संगठन में बड़ी ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। बता दे कि रत्ना चटर्जी, शोभन चटर्जी की पत्नी हैं। वें पिछले चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार पायल सरकार को लगभग 37,000 मतों के अंतर से हराया था।
एंटाली सीट से मौजूदा विधायक स्वर्ण कमल साहा ने पार्टी नेतृत्व को यह संकेत दिया है कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते। ऐसे में उनके बेटे संदीपन साहा को टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है। पिछले चुनाव में स्वर्ण साहा ने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को भारी मतों के अंतर से हराया था। इसके साथ ही वे यहां से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं।
जोरासांको सीट पर भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि वहां हिंदी भाषी मतदाताओं की संख्या काफ़ी ज़्यादा है और पार्टी नए चेहरे पर दांव लगाने पर विचार कर रही है। इस सीट से पिछले विधानसभा चुनाव में विवेक गुप्ता ने भाजपा की मीना देवी पुरोहित को हराया था।
खरदा सीट को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। बताया जा रहा है कि शोभनदेव चटर्जी इस बार वहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे, ऐसे में पार्टी किसी नए उम्मीदवार को मौका दे सकती है। बता दे कि 2021 के चुनाव में तृणमूल के काजल सिन्हा ने यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन रिजल्ट आने से पहले ही कोरोना के कारण उनका निधन हो गया। इसके बाद हुए उपचुनाव में शोभनदेव चट्टोपाध्याय यहां से भारी मतों से जीते। वहीं कमरहाटी और आसपास की सीटों पर भी नामों को लेकर अंदरखाने मंथन जारी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों में ज़िला नेताओं को कोलकाता बुलाकर वन-टू-वन बातचीत की जा रही है। इसका मकसद ज़मीनी रिपोर्ट लेना और यह समझना है कि किस सीट पर कौन सा चेहरा ज़्यादा मज़बूत साबित हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2026 के चुनाव को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस जोखिम लेने के बजाय भरोसेमंद चेहरों के साथ आगे बढ़ना चाहती है। कोलकाता जैसे अहम शहरी इलाके में पार्टी किसी बड़े प्रयोग से बच रही है।
अब सबकी निगाहें आधिकारिक उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में तृणमूल कांग्रेस कोलकाता समेत कई अहम सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर सकती है।
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