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अकाली दल के चुनाव चिन्ह तकड़ी पर संकट, पुनर्सुरजीत गुट ने आयोग में ठोका दावा, बढ़ी सियासी हलचल

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शिरोमणि अकाली दल का चुनाव चिन्ह तकड़ी।  



इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। पंजाब की राज्य पार्टी शिरोमणि अकाली दल का चुनाव चिन्ह तकड़ी पर खतरा मंडराने लगा है। दो दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब से जारी हुए हुक्मनामे में पार्टी के लिए नई लीडरशिप को आगे लाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर जो भर्ती अभियान शुरू करने का आदेश जारी किया गया था, उसके बाद से ही पार्टी दोफाड़ हो गई थी।

पार्टी के ज्यादातर सीनियर नेता अकाली दल पुनर्सुरजीत बनाकर अलग हो गए और उन्होंने अपने आप को असल अकाली दल के रूप में पेश करते हुए निर्वाचन आयोग में एक याचिका दायर करके चुनाव चिन्ह तकड़ी की मांग की और साथ ही अपनी पार्टी का नाम अकाली दल रखने की इजाजत मांगी।

पार्टी नेता ने याचिका दायर करने से पूर्व पिछले साल की 24 जुलाई को ज्यादातर पदाधिकारियों से हस्ताक्षर करवाकर याचिका दायर की है जिसमें सरपरस्त के तौर पर सुखदेव सिंह ढींडसा के भी हस्ताक्षर हैं।

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चुनाव आयोग ने जताया ऐतराज

सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग ने इस पर ऐतराज जताया कि एक जैसा नाम कैसे दिया जा सकता है। आप लोगों की नई पार्टी है तो आप कुछ अलग नाम रखो। यह भी कहा गया कि 1992 के बाद चुनाव आयोग ने पार्टियों के दोफाड़ होने पर एक जैसे नाम नहीं दिए हैं।

अकाली दल पुनर्सुरजीत की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पार्टी नई नहीं बनी है बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के आदेश के बाद पार्टी दोफाड़ हो गई है और उसके ज्यादातर पदाधिकारियों ने सुखबीर बादल का साथ छोड़ दिया है इसलिए पार्टी के चुनाव चिन्ह और नाम पर केवल उनका अधिकार है।

इसके पीछे पार्टी की ओर से यह दलील दी कि पार्टी के पदाधिकारी जिस गुट के पास ज्यादा होते हैँ उसे ही चुनाव चिन्ह और नाम मिलता है।

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याचिका की सुनवाई के लिए आयोग तैयार

दलीलों पर सहमति जताते हुए चुनाव आयोग ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है हालांकि उधर शिरोमणि अकाली दल के उपप्रधान और पार्टी सचिव डा दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि उन्हें अभी चुनाव आयोग का कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर मिला तो वह कानूनी तौर पर इसका जवाब देंगे।

उन्होंने कहा कि अकाल दल पुनर्सुरजीत ने तो भर्ती भी सही ढंग से नहीं की है। काबिले गौर है कि जब भी पार्टियों में इस प्रकार का विवाद होता है तो चुनाव चिन्ह आदि को फ्रीज कर दिया जाता है। हालांकि शिरोमणि अकाली दल के साथ अभी ऐसा नहीं हुआ है।

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