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ब‍िहार में अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए जदयू सांसद ने उठाए जनहित के मुद्दे, मृत्‍यु भोज को बताया समाज के ल‍िए अभ‍िशाप

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JDU सांसद गिरिधारी यादव ने अपनी ही सरकार को घेरा, मृत्युभोज और शिक्षा पर उठाए सख्त सवाल



संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। राजनीति के शोर और पक्ष-विपक्ष की रस्साकशी के बीच कभी-कभी ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं, जो व्यवस्था के बंद दरवाजों को झकझोर देती हैं। बांका सांसद गिरिधारी यादव इन दिनों समाज सुधारक के तेवर में नजर आ रहे हैं। मंगलवार को जमुई के सिमुलतला अंतर्गत नागवे गांव में मुंगेर-जमुई कोपरेटिव बैंक के उपाध्यक्ष श्रीकांत यादव की माता की शोक सभा में उनकी बेबाकी ने यह साबित किया कि जनहित के लिए कभी-कभी अपनी ही परिपाटी के खिलाफ खड़ा होना पड़ता है।
मृत्यु भोज पर सख्त टिप्पणी

समाज में गहरी पैठ बना चुकी ‘मृत्युभोज’ की कुप्रथा पर प्रहार करते हुए सांसद का गला रुंध गया, लेकिन तर्क अडिग थे। उन्होंने कहा, “एक परिवार अपने आत्मीय को खोने के गम में डूबा है और समाज वहां स्वाद तलाश रहा है। जब एक गरीब अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर या गहने गिरवी रखकर मृत्युभोज कराता है, तो वह अपने बच्चों का भविष्य परोस रहा होता है।“ उन्होंने अपील की कि जब तक सक्षम लोग दिखावे का त्याग नहीं करेंगे, तब तक गरीब कर्ज के चक्रव्यूह से मुक्त नहीं हो पाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष

सांसद ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर स्कूल खोलने की सराहना तो होती है, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल खड़े हैं। उन्होंने कहा, “अभिभावकों की उदासीनता और कोचिंग मंडी की ओर भागते बच्चों ने सरकारी स्कूलों को महज हाजिरी केंद्र बना दिया है।“ उन्होंने सामर्थ्यवान लोगों से अपील की कि वे धर्म और यज्ञ के साथ-साथ शिक्षा में निवेश करें, ताकि मेधावी बच्चों को पलायन का दंश न झेलना पड़े।
जनता का दर्द सर्वोपरि

गिरिधारी यादव ने कहा कि उन्हें मंत्री पद का मोह नहीं है, बल्कि जनता की तकलीफ को संसद तक पहुंचाना सर्वोपरि है। रेलवे की समस्याओं पर अपनी ही गठबंधन सरकार को संसद में घेरने के सवाल पर उन्होंने सादगी से कहा, “अगर बच्चा रोएगा नहीं, तो मां दूध नहीं पिलाएगी। जनता ने मुझे मूकदर्शक बनने के लिए नहीं, उनकी तकलीफ को सदन की दहलीज तक पहुंचाने के लिए चुना है।“
मौन के बाद सच्चाई की बात

सिमुलतला के नागवे गांव में लीलावती देवी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सांसद ने दो मिनट के मौन के बाद जो शब्द कहे, वे सिर्फ बयान नहीं बल्कि समाज के भीतरी कैंसर का उपचार थे। मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों की आंखों में उनके प्रति सम्मान इस बात का गवाह था कि जनता अब वादा नहीं, सच सुनना चाहती है।
स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों की मौजूदगी

इस अवसर पर जिला पार्षद प्रतिनिधि आलोक राज, पूर्व मुखिया परमानंद दास, कमल यादव, मुखिया प्रतिनिधि रामदेव यादव, नारायण राम, कामदेव हाजरा, राजेश यादव, रामसेवक यादव, प्रकाश पंडित और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।   
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