search

जहां अंतिम यात्रा होती है उसी खाट पर, मुंगेर के एक प्रखंड की अजीब लेकिन भावपूर्ण परंपरा

cy520520 2026-2-25 12:56:23 views 455
  

अनसुनी परंपरा : मुंगेर के पहाड़पुर में मृतकों को उनके जीवन की खाट पर दी जाती है अंतिम विदाई।  



संवाद सूत्र, हवेली खड़गपुर (मुंगेर)। तेजी से बदलते दौर में जब जीवन और रीति-रिवाज़ बदलते जा रहे हैं, हवेली खड़गपुर प्रखंड के पहाड़पुर गांव की एक अनोखी परंपरा आज भी कायम है। यहां अंतिम यात्रा पारंपरिक अर्थी पर नहीं, बल्कि खाट पर निकाली जाती है—वही खाट जिस पर व्यक्ति ने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया। यह परंपरा सिर्फ एक क्रिया नहीं, बल्कि मृतक के प्रति अंतिम सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक है।
जीवन से जुड़ी विदाई

मंगलवार को गांव के देवेंद्र प्रसाद सिंह (73) के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा उसी परंपरा के अनुसार खाट पर निकाली गई। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह रीति उनके पूर्वजों से चली आ रही है और आज तक किसी ने इसे तोड़ने की कोशिश नहीं की। अनिल कुमार सिंह कहते हैं, “हमारे गांव की आबादी लगभग तीन हजार है। यहां मान्यता है कि जिस खाट पर व्यक्ति ने जीवन बिताया, उसी पर उसे विदा किया जाए। यह अंतिम सम्मान की अभिव्यक्ति है।”
युवा पीढ़ी में भी बनी पहचान

युवा मनोज कुमार हिमांशु कहते हैं कि पहले आसपास के लोग इस परंपरा को अजीब मानते थे, पर अब यही हमारी पहचान बन चुकी है। उनका मानना है कि यह दिखावा नहीं, बल्कि भावना है। मृतक के जीवन को उसके ही संसार से जोड़ने का यह सबसे सादा और पवित्र तरीका है। गांव के विमलेंद्र कुमार सिंह इसे पूर्वजों की सीख और संस्कृति का हिस्सा बताते हैं।
पूरे विधान के साथ अंतिम यात्रा

शव को उसी खाट पर लिटाया जाता है जिस पर मृतक जीवन में विश्राम करता था। खाट को पहले साफ किया जाता है और उस पर सफेद कपड़ा बिछाया जाता है। पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम यात्रा निकाली जाती है। गांव के लोग कंधा देने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
सामाजिक एकजुटता का प्रतीक

श्मशान घाट तक यात्रा सादगी, श्रद्धा और शांति के साथ पूरी की जाती है। परंपराओं के टूटते परिवेश में पहाड़पुर गांव की यह अनूठी विरासत सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रतीक बन चुकी है।
भावनाओं का स्पर्श

यह परंपरा दिखाती है कि विदाई चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर उसमें भावनाओं का स्पर्श हो तो वह यात्रा भी मन को छू जाती है। यही कारण है कि पहाड़पुर गांव की यह परंपरा आसपास के इलाकों में चर्चा का केंद्र बन चुकी है और आने वाली पीढ़ियाँ भी इसे निभाएंगी।   
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
164725