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जम्मू-कश्मीर की निचली अदालतों में करीब चार लाख मामले लंबित, 62 प्रतिशत हैं आपराधिक, पढ़िए पूरी डिटेल

Chikheang 4 hour(s) ago views 463
  

जम्मू-कश्मीर में बीते 30 वर्षों में 232 जिला एवं अन्य अदालतों में केस लंबित हुए हैं।



जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर की निचली अदालतों में जनवरी 2026 के अंत तक कुल तीन लाख 89 हजार 210 मामले लंबित हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इनमें से करीब 62 प्रतिशत आपराधिक मामले हैं।लंबित मामलों में 58 हजार से अधिक केस ऐसे हैं जो पांच से 30 वर्ष से विचाराधीन हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार जम्मू जिला 20 जिलों में सबसे अधिक 77,992 लंबित मामलों के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद श्रीनगर में 62,785 मामले लंबित हैं। दोनों जिले मिलकर केंद्र शासित प्रदेश के कुल लंबित मामलों का लगभग एक-तिहाई योगदान दे रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, बीते 30 वर्षों में 232 जिला एवं अन्य अदालतों में यह केस लंबित हुए है। सालाना आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले कुछ वर्षों में नए केसों की संख्या अधिक रही है। कुल लंबित मामलों में दो लाख 38 हजार 373 केस, जोकि 60 प्रतिशत से अधिक है, एक वर्ष से कम पुराने हैं।

वहीं तीन से पांच वर्ष के बीच 36,849, पांच से सात वर्ष में 25,746 और सात से दस वर्ष में 20,732 मामले लंबित हैं। हालांकि, पुराने मामलों का बोझ अब भी बना हुआ है। 10 से 15 वर्ष से 9,778, 15 से 20 वर्ष से 1,857, 20 से 30 वर्ष से 424 मामले इन अदालतों में लंबित हैं, जबकि 30 वर्ष से अधिक पुराने 13 मामलों में भी अभी फैसले आना बाकी है।
जिला स्तर पर लंबित केस

जम्मू जिला :

  • 30 वर्ष से अधिक समय से लंबित केस 11
  • 20 से 30 वर्ष के 238 केस
  • 15 से 20 वर्ष के 830 केस
  • 10 से 15 वर्ष के 3516 केस
  • 5 से 10 वर्ष के 13,736 केस


श्रीनगर जिला :

  • 30 वर्ष से अधिक समय से लंबित केस 2
  • 20 से 30 वर्ष के 96 केस
  • 15 से 20 वर्ष के 336 केस
  • 10 से 15 वर्ष के 1281 केस
  • 5 से 10 वर्ष के 6988 केस


अनंतनाग : कुल लंबित केस : 31,969
बारामूला : कुल लंबित केस : 28,495
बडगाम : कुल लंबित केस : 21,070
कुपवाड़ा : कुल लंबित केस : 18,874
किश्तवाड़ : कुल लंबित केस : 3852
रियासी : कुल लंबित केस : 6857
भद्रवाह : कुल लंबित केस : 7840
रामबन : कुल लंबित केस : 8060
एक्शन प्लान पर हो रहा काम

लंबित केसों का बोझ कम करने के लिए जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने एक माडल एक्शन प्लान तैयार किया है, जो हाईकोर्ट और जिला कोर्ट, दोनों में लंबित केसों को कम करने पर केंद्रित है।

यह राष्ट्रीय स्तर की चरणबद्ध पहलों के अनुरूप है, जिनमें जुलाई 2025 से पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए अदालतों के कम्प्यूटरीकरण, विभिन्न स्तरों पर नई अदालतों के सृजन और नियमित लोक अदालत के आयोजन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

वर्ष 2024-25 में ही लोक अदालतों के जरिए आठ लाख 68 हजार 414 मामलों का निस्तारण हुआ। गांव स्तर पर विवाद निपटान के लिए देहाती अदालतों (देही अदालत) को सक्रिय करने और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर भी काम जारी है।

निचली अदालतों में जजों की स्थिति पर अधिकारियों ने बताया कि 339 स्वीकृत पदों में से 284 कार्यरत हैं और 55 पद रिक्त हैं। रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया नियमित रूप से चल रही है। फिलहाल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 42 पदों पर चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।   
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