संवाद सूत्र, बरसाना। बुधवार की सुबह राधारानी के दरबार में द्वापर युगीन होली की झलक सजीव हो उठी। आकाश में उड़ते सतरंगी गुलाल और पिचकारियों से बरसते रंगों ने पूरे कस्बे को रंगमय बना दिया। ब्रह्मांचल पर्वत से लेकर गलियों और मंदिर प्रांगण तक रंगों का ऐसा अद्भुत संसार सजा कि श्रद्धालु भक्ति और उत्साह में सराबोर दिखाई दिए।
ब्रह्मांचल पर्वत से धरा तक बस गया रंगों का संसार
फाल्गुन मास की उमंग के बीच सुबह होते ही होली का उल्लास तेज होने लगा। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, रंगों की बौछार भी तेज होती गई। कस्बे की गलियों में खड़े स्थानीय लोग परिक्रमा कर रहे श्रद्धालुओं पर गुलाल और रंग की वर्षा करते रहे। ढोल-नगाड़ों और होरी गीतों की स्वर लहरियों के बीच पूरा वातावरण ब्रजरस से ओतप्रोत हो उठा।
सतरंगी सागर में डूब गया बरसाना
विश्व प्रसिद्ध रंगीली होली की छटा देखने के लिए मथुरा सहित देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही बरसाना पहुंचने लगे। श्रद्धालु “राधे-राधे” और “होरी खेलें...” के जयघोष के साथ रंगों में डूबे नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर ब्रज संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
अनेक पुरुष श्रद्धालुओं ने सखी स्वरूप धारण कर होली खेलने की परंपरा निभाई
विशेष आकर्षण यह रहा कि अनेक पुरुष श्रद्धालुओं ने सखी स्वरूप धारण कर किशोरीजी के दरबार में होली खेलने की परंपरा निभाई। मान्यता है कि राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम की स्मृति में यह अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो आज भी उसी उल्लास और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
दिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं
मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। सुरक्षा के बीच श्रद्धालु रंग और भक्ति के इस अद्भुत संगम का आनंद लेते रहे। बरसाना की रंगीली होली का यह दृश्य मानो द्वापर युग की झांकी को वर्तमान में साकार करता नजर आया।