परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर नहीं होना चाहिए कोई मकान। प्रतीकात्मक
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। बनभूलपुरा में रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई के दौरान पीएम आवास योजना का जिक्र भी किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ लेने के मानक भी तय हैं। परिवार की कुल सालाना आय तीन लाख से ज्यादा होने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता। इसके अलावा किसी भी सदस्य के नाम पर देश में कहीं कोई घर होने पर भी पात्रता श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता।
पीएम आवास योजना शहरी 2.0 को लेकर चार किश्तों में 2.75 लाख की आर्थिक सहायता की जाती है। जिस जमीन पर मकान बनाया जाता है। आवेदक के नाम पर उसकी रजिस्ट्री जरूरी है। भूखंड को लेकर किसी भी तरह का कानूनी विवाद होने की स्थिति में भी आवेदन मान्य नहीं होता।
आवेदन करते समय दिए शपथ पत्र में यह भी बताना पड़ता है कि परिवार के किसी भी सदस्य को पिछले 20 साल में किसी भी तरह की आवासीय योजना का लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा घर बनाने के बाद अगले पांच साल तक उसकी बिक्री भी नहीं की जा सकती। आवेदन फार्म के साथ ही शर्तों से जुड़ा शपथपत्र भी निगम दफ्तर में जमा करना पड़ता है।
नैनीताल में जमीन नहीं, ऊधम सिंह नगर में फ्लैट योजना
पीएम आवास योजना के तहत बहुमंजिला फ्लैट का निर्माण कर भी लोगों का घर का सपना पूरा किया जाता है। ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को भी जगह मिल सके।
शहरी क्षेत्र में जमीन का अभाव होने के कारण इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू कर किए गए हैं। एक फ्लैट के निर्माण में छह लाख का खर्चा होता हैै। केंद्र व राज्य सरकार मिलकर ढाई लाख की सब्सिडी देती है। जबकि साढ़े तीन लाख का लोन कराया जाता है। नैनीताल जिले में वर्तमान में ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं है। हालांकि, ऊधम सिंह नगर में बहुमंजिला आवास बन रहे हैं।
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