सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर सरकार ने टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) आयोजित कराने के लिए जम्मू एंड कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन व स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी को नोडल एजेंसी नामित किया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के आदेश के अनुपालन में लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधान सभी स्कूलों पर लागू होंगे, सिवाय अल्पसंख्यक संस्थानों के। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। सीमित परिस्थितियों में ही छूट दी जा सकती है।
जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से कम समय शेष है, उन्हें सेवा जारी रखने के लिए टीईटी पास करने से छूट दी गई है लेकिन ऐसे शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे, जब तक वे टीईटी पास नहीं करते।
सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य
जो शिक्षक शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले नियुक्त हुए और जिनकी सेवा में 5 वर्ष से अधिक समय शेष है उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। असफल रहने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है (नियमों के अनुसार देय लाभों सहित)।
जम्मू कश्मीर बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा। एनआइसी द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन होगा। सभी जिला मुख्यालयों के साथ-साथ श्रीनगर और जम्मू में परीक्षा होगी।
निगरानी स्टाफ में प्लस टू लेक्चरर (स्कूल शिक्षा विभाग), असिस्टेंट प्रोफेसर (उच्च शिक्षा विभाग) में शामिल होंगे तो सुरक्षा व्यवस्था गजटेड अधिकारियों की तैनाती होगी। परीक्षा केंद्रों पर जैमर सरकार ने निर्देश दिया है कि पूरी टीईटी प्रक्रिया अगले दो वर्षों के भीतर पूरी की जाए।  |
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