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Jharkhand Budget: समावेशी विकास की ओर तेजी से बढ़ते झारखंड का बजट, कृषि-महिला सशक्तिकर पर विशेष जोर

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समावेशी विकास की ओर तेजी से बढ़ते झारखंड का बजट। फोटो-एक्स



प्रदीप सिंह, राज्य ब्यूरो। झारखंड का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट आकार, प्राथमिकताओं और संरचना के लिहाज से एक संतुलित और दूरदर्शी दस्तावेज के रूप में उभरता है। लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में नौ फीसद की वृद्धि राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता और विकास की आकांक्षाओं को दर्शाती है।

यह प्रवृत्ति पिछले वर्षों से मेल खाती है, जहां राज्य लगातार व्यय और संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ा रहा है। बजट में राजकोषीय घाटा 2.18% रखा गया है, जो वित्तीय अनुशासन का संकेत देता है।

यह स्तर राज्यों के लिए स्वीकार्य सीमा के भीतर है और दर्शाता है कि सरकार विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है। साथ ही, पूंजीगत व्यय में वृद्धि यह स्पष्ट करती है कि सरकार दीर्घकालिक परिसंपत्तियों सड़क, पुल और स्वास्थ्य ढांचे पर निवेश बढ़ा रही है।

हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि राज्य अभी भी अपने संसाधनों के साथ-साथ केंद्र पर निर्भर है। कर एवं गैर-कर राजस्व के साथ केंद्रीय हिस्सेदारी बजट का बड़ा हिस्सा बनाती है, जो वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
कृषि और महिला सशक्तिकरण विकास के नए इंजन

बजट में महिला किसान खुशहाली योजना और नकदी फसल विस्तार जैसे कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। यह दृष्टिकोण उस नीति दिशा के अनुरूप है, जिसमें सरकार महिला नेतृत्व वाले विकास को प्राथमिकता दे रही है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और सहकारी ढांचे के माध्यम से कृषि को बाजार से जोड़ने का प्रयास सकारात्मक है। यदि इसे प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण आय में वास्तविक वृद्धि ला सकता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश विकास की रीढ़

सड़क, पुल और ग्रामीण संपर्क योजनाओं के लिए बड़े प्रावधान राज्य के भौतिक विकास को गति देंगे। साथ ही, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्ताव और 20 हजार करोड़ के संभावित निवेश से रोजगार सृजन की उम्मीद है।

झारखंड जैसे खनिज समृद्ध राज्य के लिए उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए नीतिगत स्थिरता और प्रशासनिक दक्षता जरूरी है। कैंसर जांच, मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक उपकरण, एआइ प्रशिक्षण और विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम राज्य के मानव पूंजी निर्माण की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश दीर्घकालिक विकास का आधार बनता है और यह बजट इस तथ्य को स्वीकार करता है। नेतरहाट, दशम जलप्रपात, पतरातू और रजरप्पा जैसे स्थलों के विकास से पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार भी सृजित होंगे।

  
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