जागरण संवाददाता (आनंदनगर) महराजगंज। जनपद में गन्ना उत्पादन बढ़ाने और उन्नत किस्मों के विस्तार के लिए गन्ना विभाग ने व्यापक योजना लागू की है। इस क्रम में गन्ना शोध संस्थान सेवरही (कुशीनगर), गन्ना शोध एवं बीज संवर्धन केंद्र लक्ष्मीपुर (कुशीनगर), गन्ना शोध केंद्र पिपराइच (गोरखपुर) तथा गन्ना बीज संवर्धन केंद्र सुल्तानपुर से कुल 996.08 क्विंटल गन्ना बीज मंगाकर विभिन्न गन्ना परिषदों को आवंटित किया है। साथ ही सिंगल बड तकनीक को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
इसके पिछे मुख्य उद्देश्य है, कि परंपरागत तरीके से खेती कर रहे किसानों को उन्नत बीज मिले और उनकी पैदावार बेहतर हो। गन्ना विभाग की ओर से इसके लिए गन्ना परिषद स्तर पर इन नई किस्मों के गन्ना बीज की बुआई के लिए लगातार जागरूक भी किया जा रहा है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक घुघली हरिनारायण ने बताया कि कुशीनगर के सेवरही से 300 क्विंटल अर्ली एवं 100 क्विंटल सामान्य प्रजाति प्राप्त हुई।
50 क्विंटल सिसवा परिषद को दिए
अर्ली में 13235 कोशा प्रजाति के 50 क्विंटल सिसवा परिषद को दिए गए। 14201 प्रजाति के 150 क्विंटल (50-50 क्विंटल सिसवा, घुघली, गड़ौरा) तथा 17231 प्रजाति के 100 क्विंटल (50-50 क्विंटल घुघली व गड़ौरा) आवंटित हुए। सामान्य प्रजाति के 100 क्विंटल में सिसवा व घुघली को 50-50 क्विंटल दिया गया। इसी क्रम में पिपराइच, गोरखपुर से 100 क्विंटल अर्ली (05125) में 30 क्विंटल फरेंदा तथा 70 क्विंटल घुघली को आवंटित हुआ।
290 क्विंटल सामान्य प्रजाति में सिसवा, गड़ौरा व घुघली को 80-80 क्विंटल तथा फरेंदा को 50 क्विंटल मिला है। लक्ष्मीपुर, कुशीनगर से 200 क्विंटल बीज प्राप्त हुआ। अर्ली 13235 के 100 क्विंटल में 50-50 क्विंटल सिसवा व गड़ौरा को दिए गए। सामान्य 100 क्विंटल में 25 क्विंटल सिसवा तथा 75 क्विंटल गड़ौरा को आवंटित हुआ। इसके अलावा सिंगल बड में सेवरही से 17451 प्रजाति के तीन क्विंटल (एक-एक क्विंटल सिसवा, घुघली, गड़ौरा) तथा सुल्तानपुर से 18231 व 16202 प्रजाति के 3.08 क्विंटल बीज इन्हीं परिषदों को वितरित किए गए।
बसंतकालीन गन्ना बुआई के लिए शासन स्तर से जिले में अलग-अलग गन्ना शोध केंद्रों से कुल 996 क्विंटल गन्ने का बीज आवंटित हुआ है। किसानों को केवल बीज का मूल्य देना होगा, परिवहन व्यय विभाग वहन करेगा। जिले में गड़ौरा व सिसवा चीनी मिल संचालित हैं, तथा करीब 20 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। -ओम प्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी  |
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