लंदन/नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब फरहान अख्तर से जुड़ी मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने ब्रिटिश एकेडमी फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (बाफ्टा) पुरस्कार समारोह में बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म श्रेणी में जीत दर्ज की। लंदन के साउथबैंक सेंटर स्थित रॉयल फेस्टिवल हॉल में रविवार को आयोजित भव्य समारोह में ‘बूंग’ ने डिज्नी की चर्चित फिल्मों ‘लिलो एंड स्टिच’ और ‘जूटोपिया-2’ के साथ-साथ एनिमेटेड साइंस फिल्म ‘आर्को’ को पीछे छोड़ते हुए यह सम्मान हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल मणिपुर बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है, जिनकी यह बतौर निर्देशक पहली फिल्म है।
संघर्ष और उम्मीद की कहानी है ‘बूंग’
‘बूंग’ की कहानी मणिपुर के एक युवक के जीवन संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। सामाजिक और व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच उसकी यात्रा को संवेदनशील और यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और समकालीन मुद्दों का गहरा समावेश है, जिसने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और निर्णायकों का ध्यान आकर्षित किया। फिल्म की सफलता इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय कहानियां भी वैश्विक मंच पर प्रभाव छोड़ सकती हैं, यदि उन्हें सशक्त कथानक और ईमानदार प्रस्तुति के साथ पेश किया जाए।
पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिल्म की जीत पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई। यह खुशी का क्षण है, खासकर मणिपुर के लिए। यह हमारे देश में अपार रचनात्मक प्रतिभा को भी उजागर करता है।” प्रधानमंत्री की इस प्रतिक्रिया को देशभर में सराहा गया और इसे पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभाओं को वैश्विक पहचान मिलने के संकेत के रूप में देखा गया।
लक्ष्मीप्रिया देवी की पहली फिल्म
निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी के लिए यह उपलब्धि विशेष मायने रखती है। यह उनकी पहली फीचर फिल्म है और पहली ही कोशिश में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किया। फिल्म जगत में उन्हें एक सशक्त और संवेदनशील कहानीकार के रूप में देखा जा रहा है।
अभिनेत्री कंगना रनोट ने भी लक्ष्मीप्रिया को बधाई देते हुए कहा, “लक्ष्मीप्रिया मेरी पहली असिस्टेंट डायरेक्टर थीं। सेट पर कहा जाता था कि वह कुछ बड़ा करने के लिए बनी हैं। आपका समय आ गया है मेरी दोस्त। आपने मनोरंजन इंडस्ट्री, भारत और नॉर्थ ईस्ट को जो सम्मान दिलाया है, वह गर्व की बात है।”
मंच पर छाईं आलिया भट्ट
बाफ्टा समारोह में अभिनेत्री आलिया भट्ट ने बतौर प्रजेंटर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार के साथ की और गैर-अंग्रेजी भाषा की फिल्मों के लिए पुरस्कार की घोषणा की। आलिया ने गुच्ची द्वारा डिजाइन किया गया कस्टम आउटफिट पहना था, जिसने रेड कार्पेट पर सबका ध्यान खींचा। समारोह में ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और केट मिडलटन की मौजूदगी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया।
‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ और ‘सिनर्स’ का दबदबा
इस वर्ष बाफ्टा में कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों ने भी बड़ी सफलता हासिल की। पॉल थॉमस एंडरसन की राजनीतिक थ्रिलर ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित कुल छह पुरस्कार जीते। रयान कूगलर की फिल्म ‘सिनर्स’ ने तीन पुरस्कार अपने नाम किए। यह किसी अश्वेत फिल्म निर्माता के लिए बाफ्टा में अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। वहीं, किर्क जोन्स की ‘आई स्वियर’ ने भी तीन पुरस्कार जीते, जिनमें रॉबर्ट अरामायो को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान शामिल है।
धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि
बाफ्टा समारोह के ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट में दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी गई। उन्हें वैश्विक सिनेमा जगत की अन्य दिवंगत हस्तियों के साथ सम्मानित किया गया। यह भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार के योगदान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक था।
नस्लीय टिप्पणी पर विवाद और माफी
समारोह के दौरान एक अप्रिय घटना भी सामने आई। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, टौरेट सिंड्रोम से पीड़ित जान डेविडसन ने मंच पर अनियंत्रित रूप से नस्लीय अपशब्द चिल्ला दिया, जब फिल्म ‘सिनर्स’ के कलाकार माइकल बी. जॉर्डन और डेलरॉय लिंडो मंच पर मौजूद थे। इस घटना के बाद मेजबान एलन कमिंग ने दर्शकों से माफी मांगी और स्पष्ट किया कि डेविडसन एक तंत्रिका संबंधी विकार, टौरेट सिंड्रोम, से पीड़ित हैं। इस स्थिति में अनचाहे मोटर और वोकल टिक्स उत्पन्न होते हैं, जो कभी-कभी आपत्तिजनक शब्दों के रूप में भी सामने आ सकते हैं। ब्रिटिश फिल्म अकादमी और बीबीसी ने भी इस टिप्पणी के प्रसारण को संपादित न करने के लिए माफी जारी की। टौरेट्स एक्शन के उपाध्यक्ष एड पाल्मर ने कहा कि प्रसारण से पहले आपत्तिजनक शब्द को ‘बीप’ करने पर विचार किया जाना चाहिए था।
भारतीय सिनेमा पर प्रतिक्रिया
फिल्ममेकर शेखर कपूर ने ‘बूंग’ की सराहना करते हुए कहा, मुझे लगा कि ‘बूंग’ उन फिल्मों से बेहतर थी जिन्होंने मुख्य अवार्ड जीते। यह भारतीय संस्कृति और राजनीति से इतनी जुड़ी है कि पश्चिमी दर्शकों के लिए इसे पूरी तरह समझना आसान नहीं रहा होगा। इसलिए जरूरी है कि हमारे फिल्म अवार्ड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिले।”
वैश्विक मंच पर क्षेत्रीय सिनेमा की पहचान
‘बूंग’ की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा केवल हिंदी या मुख्यधारा तक सीमित नहीं है। पूर्वोत्तर भारत जैसी विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाली कहानियां भी वैश्विक दर्शकों को प्रभावित कर सकती हैं। बाफ्टा जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इस जीत ने क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया है। यह उपलब्धि आने वाले समय में और अधिक स्वतंत्र और क्षेत्रीय फिल्मकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने की प्रेरणा दे सकती है। भारतीय सिनेमा के लिए यह क्षण केवल एक पुरस्कार की जीत नहीं, बल्कि विविधता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समृद्धि की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक बन गया है।

Editorial Team
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