प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। दिल्ली स्थित ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की मान्यता अमान्य पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने इससे उपाधि प्राप्त कर कार्यरत शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर विभाग ने ऐसे सभी शिक्षकों की सूची मांगी है, जो इस संस्थान से उपाधि प्राप्त कर विद्यालयों में कार्यरत हैं।
जिले में सूची तैयार करने के निर्देश
भागलपुर जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने पत्र जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और विद्यालय अवर निरीक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुछ शिक्षक ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट से प्राप्त उपाधि के आधार पर नियुक्त होकर वेतन ले रहे हैं। जबकि विभागीय निर्देशों के अनुसार यह संस्थान मान्यता प्राप्त नहीं है।
इसलिए सभी प्रखंडों को कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे शिक्षकों को चिन्हित करें और उनका नाम, संबंधित विद्यालय, नियोजन इकाई और नियुक्ति से संबंधित विवरण एक सप्ताह के भीतर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
वेतन भुगतान में पदाधिकारियों की जवाबदेही
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी शिक्षक का वेतन अमान्य उपाधि के आधार पर भुगतान किया गया है, तो संबंधित प्रखंड अधिकारी या पदाधिकारी की पूर्ण जवाबदेही होगी। इस कदम से विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिक्षा क्षेत्र में नियमानुसार नियुक्ति और वेतन भुगतान हो।
सन्हौला प्रखंड में पहले ही कार्रवाई
जिला शिक्षा विभाग की जानकारी के अनुसार बीते तीन महीने पहले सन्हौला प्रखंड के दो शिक्षकों पर कार्रवाई की जा चुकी है। स्थापना शाखा से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया। इससे पहले शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसमें पुष्टि हुई कि उन्होंने उपाधि ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट से प्राप्त की थी। इसके बाद विभाग ने उनके वेतन को बंद करने का निर्णय लिया।
विभाग का संदेश
शिक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में कोई भी शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी इस प्रक्रिया में पूरी तरह उत्तरदायी होंगे। सभी प्रखंडों को शीघ्र ही रिपोर्ट भेजने और अमान्य उपाधि से जुड़े शिक्षकों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विभागीय कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।  |