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गोरखपुर विश्वविद्यालय की शोध में बड़ी छलांग: पांच साल में तीन गुना बढ़े प्रकाशन

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गोरखपुर विश्वविद्यालय। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने शोध प्रकाशनों, बौद्धिक संपदा सृजन और शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बीते पांच वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति की है। पांच साल में प्रकाशन तीन गुणा बढ़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे लेकर उत्साहित हुआ है। उसने शोध प्रगति का आंकड़ा जारी किया है।  

जारी आंकड़ों के अनुसार, स्कोपस सूचीबद्ध जर्नलों में प्रकाशित शोधपत्रों की संख्या वर्ष 2020 में 98 से बढ़कर वर्ष 2025 में 300 से अधिक हो गई है। वहीं, वेब आफ साइंस में सूचीबद्ध जर्नलों में प्रकाशित शोधपत्रों की संख्या 2020 में 73 से बढ़कर वर्ष 2025 में 180 से अधिक पहुंच गई है। नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने लंबी छलांग लगाई है।

वर्ष 2020 में जहां केवल एक पेटेंट दायर हुआ था, वह भी विश्वविद्यालय के नाम से नहीं था, वहीं जनवरी 2024 से अब तक कुल 181 बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें 84 पेटेंट (52 वर्ष 2024–25 में व 32 वर्ष 2025–26 में), 96 कापीराइट (11 वर्ष 2024–25 में व 85 वर्ष 2025–26 में) और एक ट्रेडमार्क (वर्ष 2025–26 में) शामिल हैं।

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इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए विश्वविद्यालय के शोध विभाग ने कहा है कि शोध प्रक्रिया को बढ़ाने, बौद्धिक संपदा सृजन को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए प्रयास के चलते यह सफलता मिली है।




विश्वविद्यालय की यह प्रगति हमारे समर्पित संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। पिछले पांच वर्षों में स्कोपस और वेब आफ साइंस जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर शोध प्रकाशनों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय ने शोध गुणवत्ता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में 181 से अधिक आवेदन दायर होना यह दर्शाता है कि हमारा विश्वविद्यालय केवल सैद्धांतिक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि समाजोपयोगी एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान की दिशा में भी ठोस कदम बढ़ा रहा है।
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-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय   
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