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कौन है आतंकी जहांगीर? 36 साल से कश्मीर में एक्टिव, मां की अंतिम इच्छा को भी दुत्कारा; सेना के निशाने पर

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कैप्शन: आतंकी अब्दुल गनी उर्फ जहांगीर सरूड़ी (फाइल)



बलवीर सिंह जम्वाल, किश्तवाड़। जिले के छात्रू क्षेत्र में रविवार को मारे गए तीन आतंकियों के साथ ही सैफुल्लाह ग्रुप का सफाया होना सुरक्षाबल की बड़ी कामयाबी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए अभी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। किश्तवाड़ में तीन दशक से ज्यादा समय से सक्रिय आतंकी अब्दुल गनी उर्फ जहांगीर सरूड़ी और उसका साथी रियाज वर्षों से क्षेत्र में अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

जहांगीर वर्ष 2008 के बाद से किसी के सामने नहीं आया और न ही सुरक्षा बल से उसका कोई टकराव हुआ है। उसकी आखिरी मुठभेड़ शरोत धार पर 63 राष्ट्रीय राइफल से हुई थी, जिसमें एक मेजर बलिदान हुआ था। उसके बाद वह फरार हो गया और कई बड़ी आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें उसका हाथ माना जाता है।
तलाश में जुटे सुरक्षाबल

सुरक्षाबल ने जैसे आदिल, सैफुल्लाह और उसके साथियों को ढेर किया, अब अब जहांगीर और रियाज की बारी है, जिनकी तलाश की जा रही है। 2018-19 में परिहार बांधुओं और चंद्रकांत की हत्या में शामिल आतंकी ओसामा को सुरक्षा बल ने बटोत में ढेर कर दिया था, लेकिन तब भी यही कहा जाता था कि इसके पीछे जहांगीर का हाथ है। जहांगीर सुरक्षाबलों और एजेंसियों के रडार से बाहर है। यह सवाल भी उठता रहा है कि उसे पकड़ना इतना मुश्किल क्यों है।

संभवतः वह गुप्त तरीके से नेटवर्क चला रहा है, जिसमें युवाओं को ट्रेनिंग देना और उनके दिमाग में जिहाद की भावना पैदा करना शामिल है। सुरक्षाबल ने इस दिशा में काफी प्रयास किए हैं, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। किश्तवाड़ के छात्रू में जहां अब तीन आतंकियों को ढेर किया है, वहां से आगे मड़वा और बाड़वान का इलाका है, जहां आतंकियों की हलचल की सूचना मिलती है।
मां ने की थी सरेंडर की गुजारिश

बता दें कि आतंकी रियाज भी इसी इलाके का निवासी है, जिसकी मां ने हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर वीडियो के जरिए बेटे से आत्मसमर्पण करने की गुजारिश की थी। रियाज की मां की मृत्यु हो गई। यह उसकी आखिरी इच्छा थी कि उसका बेटा आत्मसमर्पण कर दे। एक महीने बीतने के बाद रियाज ने अपनी गतिविधियों की भनक नहीं लगने दी।
बूढ़ा हो चुका है जहांगीर, सेटेलाइट फोन का करता इस्तेमाल

आतंकी जहांगीर की उम्र भी अब 60 साल से अधिक हो चुकी है, क्योंकि वह 90 के दशक में आतंकी बना था। इस उम्र में बंदूक लेकर भागना उसके लिए मुश्किल है, लेकिन वह कहीं एक ठिकाने पर बैठकर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को अंजाम दे सकता है। जहांगीर के भूमिगत होने के बाद उसके हथियारों का कोई पता नहीं चला। उसके पास एक एलएमजी और एक सेटेलाइट फोन भी बताया जाता था।   
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