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स्वामी आगमानंद के साथ पीरपैंती में भव्य यज्ञ और भागवत कथा का अनूठा अनुभव, आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को क‍िया जीवंत

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संवाद सूत्र, पीरपैंती (भागलपुर)। भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड के सुंदरपुर कृषि फॉर्म शाखा मैदान में रविवार से दो दिवसीय श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ सह श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन शुरू हुआ। जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में यह कार्यक्रम भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक उन्नति का अद्भुत अनुभव लेकर आया। स्वामी आगमानंद जी महाराज श्री शिवशक्ति योगपीठ, नवगछिया के पीठाधीश्वर और श्री उत्तरतोताद्रि मठ, विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी भी हैं, जो उनके आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को और गहराई प्रदान करते हैं।

यज्ञ एवं कथा का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर विधायक मुरारी पासवान, प्रमुख रश्मि कुमारी, विवेका गुप्ता, मुखिया अरविंद साह, संजीव कुमार, सोनी देवी, महादेव मंडल, विनय पांडेय, कंचू राम सहित अन्य ने संयुक्त रूप से किया।

  
कथा और यज्ञ का प्रथम दिन

पहले दिन स्वामी आगमानंद जी महाराज ने महारुद्र यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण और फसल की सुरक्षा के लिए यज्ञ का आयोजन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के जीवन के आदर्श, कर्म, कर्तव्य और आचरण का मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा, “भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के संपूर्ण मार्गदर्शन का स्रोत है। इसमें सृष्टिकर्ता परमात्मा का स्वरूप और महिमा वर्णित है।”

उसी अवसर पर अग्नि स्थापन के साथ यज्ञ प्रारंभ हुआ। यज्ञाचार्य पंडित अनिरुद्ध शास्त्री और गौतम सामवेदी के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों ने पूरे मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत हवन‑पूजन करवाया। प्रमुख यजमानों में राज आनंद, सिंपी कुमारी, अनिल कुमार साह, रेखा देवी, पप्पू मंडल, श्वेता देवी शामिल थे।

यज्ञ समिति के सभी पदाधिकारी इस प्रकार थे : अध्यक्ष पप्पू साह, सचिव रंजीत पासवान, उपाध्यक्ष गुंजन साह, उपसचिव अनिल राय, ऋषिकेश सिंह, कोषाध्यक्ष रोहित पासवान, उपकोषाध्यक्ष सूरज कुमार, अजय तांती, रविंद्र पासवान, गुड्डू तांती, प्रदीप पासवान, कमलेश कुमार, अरविंद पासवान, श्रवण कुमार, कुशल राज।

उक्त अवसर पर प्रमुख उपस्थित व्यक्ति थे: स्वामी शिव प्रेमानंद महाराज भाई जी, स्वामी मानवानंद महाराज, कुंदन बाबा, स्वामी तत्वानंद, प्रभात कुमार स‍िंह, सुबोध दा। साथ ही स्वामी जीवनानंद स्वामी यज्ञ स्थल पर सान्यासी के रूप में उपस्थित हैं, जो भक्तों को मार्गदर्शन और आध्यात्मिक उपदेश देते रहेंगे। सातों दिन वहीं रहेंगे।   

  
दूसरे दिन और भक्तिमय माहौल

दूसरे दिन भी भक्तों की भारी भीड़ यज्ञ स्थल पर उमड़ी। यज्ञाचार्य पंडित अनिरुद्ध शास्त्री और गौतम सामवेदी के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रों के साथ हवन पूजन का क्रम सुबह से शाम तक चलता रहा। यजमानों में फिर राज आनंद, सिंपी कुमारी, अनिल कुमार साह, रेखा देवी, पप्पू मंडल, श्वेता देवी आदि शामिल रहे।

स्वामी आगमानंद जी ने दूसरे दिन कथा और अमृत के अंतर पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा, “अमृत एक दिन समाप्त हो सकता है, लेकिन कथा अमृत का कलश है, जिसका रस कभी समाप्त नहीं होता। भगवान की भक्ति के बिना जीवन अधूरा है।” उन्होंने सत, चित और आनंद विषय पर भी विवेचना की।
भजन और संगीत

यज्ञ और कथा के बीच भजन संगीत ने आयोजन को और भी भक्तिमय बना दिया। भजन गायक सुर भिखारी बलवीर सिंह बग्घा और पवन दुबे ने भजन प्रस्तुत किए। इसके अलावा नंदन, दिलीप सहित दर्जनों वादक भी वहां उपस्थित थे, जिन्होंने वेदिक और भक्ति संगीत से माहौल को और जीवंत किया।   
रामलीला और मेला

रात्रि में वृंदावन से आए संतोष आचार्य की अगुवाई में रामलीला मंडली ने रावण जन्म, रावण अत्याचार और पृथ्वी पुकार प्रसंग का मंचन किया। भक्तजन देर रात तक इसे देखने में व्यस्त रहे।

यज्ञ स्थल पर मेला का आयोजन भी हुआ, जिसमें झूले, दुकाने और मनोरंजन के साधन बच्चों और महिलाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने। यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

दो दिवसीय यह श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ और भागवत कथा न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बनी, बल्कि भक्तिमय वातावरण, सामाजिक मेलजोल और आध्यात्मिक अनुभव का भी अद्भुत मंच रही।   
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