आईआईटी दिल्ली और जिंदल स्टील के बीच हुआ समझौता।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ती अवसंरचना जरूरतों और सुरक्षित निर्माण मानकों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी दिल्ली और जिंदल स्टील के बीच हुआ समझौता शैक्षणिक-औद्योगिक सहयोग का नया मॉडल बनकर उभर रहा है।
यह पहल न केवल संरचनात्मक स्टील अनुसंधान को गति देगी, बल्कि भविष्य की इमारतों, पुलों और औद्योगिक ढांचों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के निर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
समझौते के तहत संस्थान में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा, जो आधुनिक डिजाइन विधियों, नवाचार और बहु-आपदा सहनशील निर्माण तकनीकों पर काम करेगा। यहां उच्च-क्षमता स्टील के उपयोग, जीवन-चक्र लागत में कमी और संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने जैसे पहलुओं पर विशेष शोध होगा। यह केंद्र उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सेतु का काम करते हुए राष्ट्रीय स्तर का समन्वित इकोसिस्टम तैयार करेगा।
आइआइटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि, यह पहल देश की परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन और निर्माण प्रक्रियाओं को विकसित करने में सहायक होगी। इससे शोध, प्रशिक्षण और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से निर्माण क्षेत्र में नई दक्षता आएगी। वहीं जिंदल स्टील के प्रबंध निदेशक वीआर शर्मा ने इसे भारत की अवसंरचना क्रांति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्थान के साथ सहयोग से अधिक सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण समाधान विकसित होंगे।
नोडल संस्थान के रूप में आइआइटी दिल्ली अन्य प्रमुख संस्थानों आईआईटी बॉम्बे, आइआइटी हैदराबाद, आइआइटी मद्रास और आइआइटी कानपुर के साथ मिलकर अनुसंधान, कौशल विकास और नीति सहयोग को एकीकृत दिशा देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की साझेदारियां ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टि के अनुरूप मजबूत, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में निर्णायक साबित होंगी।
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