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घर का फ्रिज बिका, पायलट बनने का सपना टूटा... फिर ऐसे खड़ा किया 60 हजार करोड़ का IDFC; बने भारत के बड़े बैंकर!

deltin33 3 hour(s) ago views 152
  



नई दिल्ली। बचपन में छत से गिरने की एक दुर्घटना ने जिस लड़के का लड़ाकू विमान उड़ाने का सपना छीन लिया, उसी ने आगे चलकर भारत के बैंकिंग सेक्टर में अपनी अलग पहचान बना ली। यह कहानी है वी. वैद्यनाथन, जो आज IDFC First Bank के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हैं। आज भले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank Fraud) 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी को चर्चा में है लेकिन इसके फाउंडर की कहानी बड़ी दिलचस्प है।
पायलट बनने का सपना क्यों टूटा?

ओडिशा में बचपन के दिनों में वैद्यनाथन छत से गिर गए थे, जिससे उनकी बाईं आंख चोटिल हो गई थी। उन्होंने भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बनने का सपना देखा था। पत्रकार तमाल बंद्योपाध्याय की किताब के मुताबिक परिवार ने आंख की सर्जरी के लिए घर का फ्रिज तक बेच दिया, लेकिन मेडिकल टेस्ट में वे फिर भी पास नहीं हो पाए। हार मानने के बजाय उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया और यहीं से उनकी बैंकिंग की यात्रा शुरू हुई।

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बैंकिंग करियर की शुरुआत से शिखर तक

1990 में BIT मेसरा से पढ़ाई के बाद उन्होंने सिटीबैंक (Citibank) जॉइन किया और ऑटो फाइनेंस डिविजन के प्रमुख बने। बाद में वे ICICI बैंक में शामिल हुए, जहां 38 वर्ष की उम्र में वे सबसे कम उम्र के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बने। उस समय बैंक की सीईओ चंदा कोचर थीं।

2010 में उन्होंने जोखिम उठाते हुए घाटे में चल रही फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग्स (Future Capital Holdings) में निवेश किया और उसे बदलकर कैपिटल फर्स्ट (Capital First) बनाया। बाद में 2018 में इसका विलय IDFC बैंक से हुआ और नया बैंक IDFC फर्स्ट बैंक बना। IDFC FIRST बैंक भारत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से 3 वर्षों के लिए 4.2 करोड़ रुपये प्रति मैच के हिसाब से प्रायोजन प्राप्त करने वाला बैंक बना।
बैंक का मालिक कौन है?

IDFC First Bank किसी एक व्यक्ति की निजी कंपनी नहीं है। इसका प्रमोटर पहले IDFC Limited था, जिसके पास लगभग 40% हिस्सेदारी थी। प्रस्तावित विलय के बाद संरचना सरल होकर बैंक एक व्यापक शेयरहोल्डर-आधारित संस्था बन रही है, यानी इसमें किसी एक व्यक्ति या परिवार का नियंत्रण नहीं है।
कर्मचारियों और गुरु को दिए शेयर

वैद्यनाथन ने अपने ड्राइवर, ट्रेनर और स्टाफ को करोड़ों रुपये के शेयर गिफ्ट किए। उन्होंने अपने पुराने गणित शिक्षक की मदद के लिए भी लाखों रुपये के शेयर गिरवी रखे, वही शिक्षक जिन्होंने कभी उन्हें इंटरव्यू देने जाने के लिए 500 रुपये उधार दिए थे। भारत का बैंकिंग सेक्टर तेजी से बड़े समूहों जैसे HDFC Bank-HDFC समूह के इर्द-गिर्द संगठित हो रहा है।
IDFC फर्स्ट बैंक में 3.5 करोड़ ग्राहक

IDFC फर्स्ट बैंक की वेबसाइट के मुताबिक 3.5 करोड़ ग्राहक थे, जिसका कुल ग्राहक कारोबार 5,62,090 करोड़ रुपये रहा। इसमें 2,82,662 करोड़ रुपये की ग्राहक जमा राशि और 2,79,428 करोड़ रुपये के लोन और एडवांस शामिल हैं। IDFC फर्स्ट बैंक शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। इसका मार्केट कैप NSE के मुताबिक 60,151 रुपये है।
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