घोसी चीनी मिल पर किसानों का आक्रोश, मंत्री के आश्वासन के बाद भी गन्ना खरीद ठप।
जागरण संवाददाता, मऊ। घोसी चीनी मिल गेट पर सोमवार की सुबह से ही मिल और किसानों के बीच विवाद को लेकर गहमागहमी बनी रही। दोपहर में विपक्ष के नेताओं के साथ किसान जुटे, जिसके चलते मिल में प्रवेश करने को लेकर पुलिस से काफी देर तक धक्का-मुक्की होती रही। इस दौरान मिल प्रबंधन ने गेट को बंद कर लिया, जिससे परिसर के बाहर नारेबाजी होती रही।
दरअसल, घोसी चीनी मिल को बंद कर सठियांव गन्ना भेजे जाने के कारण किसान आक्रोशित थे। यह मिल अब सठियांव से अटैच कर दी गई है, जिसके खिलाफ किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि, घोसी चीनी मिल को बंद करने के आदेश पर मंत्री ए के शर्मा द्वारा रोक लगाने की जानकारी दी गई थी, जिससे क्षेत्र के गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिली। पहले मिल बंद होने और गन्ने को आजमगढ़ की सठियांव सहकारी चीनी मिल में भेजने के आदेश से किसानों में असंतोष था।
वहीं मिल प्रशासन ने किसी भी प्रकार के आदेश न मिलने की बात कहते हुए गन्ना लेने से मना कर दिया, जिससे किसान फिर से आक्रोशित हो गए। किसानों का कहना है कि यदि मिल बंद होती है, तो उन्हें गन्ने की उचित कीमत नहीं मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि मिल प्रबंधन जानबूझकर उन्हें परेशान कर रहा है और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रहा है। इस स्थिति को देखते हुए किसानों ने मिल गेट पर धरना देने का निर्णय लिया। धरने में शामिल किसानों ने कहा कि वे तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
किसानों का कहना है कि गन्ना उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और मिल के बंद होने से उन्हें भारी नुकसान होगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मिल को फिर से चालू किया जाए और गन्ने की खरीद में कोई रुकावट न आए।
इस बीच, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे और भी बड़े आंदोलन की योजना बना सकते हैं। |