75 वर्षीय जिंदा किसान को कागजों में मारकर रोक दी पीएम-किसान और सीएम-किसान की रकम
जागरण संवाददाता, अनुगुल। बरगढ़ जिले से प्रशासनिक लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 75 वर्षीय किसान चमार बारिक को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जीवित हैं। कागजों में ‘मृत’ दर्ज होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) और मुख्यमंत्री किसान योजना (सीएम-किसान) की आर्थिक सहायता मिलनी बंद हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बरगढ़ जिले के बेनियापाली गांव निवासी चमार बारिक पिछले कई वर्षों से किसान योजनाओं का लाभ ले रहे थे। हाल ही में जब उनके खाते में किस्त की राशि नहीं पहुंची तो उन्होंने संबंधित विभाग से संपर्क किया। जांच में पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शाया गया है, जिसके चलते उनके नाम पर सभी लाभ रोक दिए गए हैं।
बुजुर्ग किसान ने आरोप लगाया कि यह गंभीर त्रुटि जानबूझकर की गई हो सकती है। उन्होंने इस संबंध में ब्लॉक कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो सका है। आर्थिक रूप से कमजोर बारिक के लिए यह सहायता खेती और दैनिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। बरगढ़ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट प्रसन्न कुमार पांडेय ने कहा कि यदि किसान जीवित और पात्र पाए जाते हैं तो उनका नाम तुरंत संशोधित कर योजनाओं का लाभ बहाल किया जाएगा। साथ ही, त्रुटि के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की सहायता तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में दी जाती है, जबकि राज्य सरकार की सीएम-किसान योजना भी किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहयोग प्रदान करती है।
इस घटना ने ओडिशा में सरकारी डाटा प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारीक के शुभचिंतकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में किसी भी जीवित व्यक्ति को कागजों में ‘मृत’ घोषित करने जैसी गंभीर चूक दोबारा न हो। |