कांग्रेस और आप एक-दूसरे के नेताओं व कार्यकर्ताओं को शामिल कर सियासी बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव वर्ष 2026 के अंत में प्रस्तावित हैं और उससे पहले शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रमुख राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) एक-दूसरे के नेताओं व कार्यकर्ताओं को शामिल कर सियासी बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सोमवार को आप के प्रभारी रहे दिवंगत प्रदीप छाबड़ा की पत्नी रितु छाबड़ा अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होंगी। उनके साथ हरजिंदर सिंह बावा, कुलदीप सिंह कुक्की और येंकी कालिया के भी कांग्रेस का दामन थामने की चर्चा है। इसके अलावा आप से अलग-थलग चल रहीं पार्षद प्रेमलता के भी कांग्रेस में जाने की संभावना जताई जा रही है।
यदि ऐसा होता है तो इसे आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रदीप छाबड़ा पहले कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे और बाद में आप में शामिल हुए थे। आप सरकार के दौरान उन्हें पंजाब इंडस्ट्री बोर्ड का चेयरमैन भी बनाया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष एच एस लक्की इन नेताओं को पार्टी में शामिल करवाएंगे।
गौरतलब है कि मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस और आप का गठबंधन टूट गया था। आप प्रभारी जरनैल सिंह की टिप्पणी को कांग्रेस ने गठबंधन टूटने की मुख्य वजह बताया था। इससे पहले कांग्रेस ने बैठक कर आप को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों के बीच तल्खी बढ़ती गई।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस को झटका देने का दावा किया है। आप चंडीगढ़ के सह-प्रभारी डॉ. सन्नी सिंह आहलूवालिया और प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह यादव की मौजूदगी में युथ कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट-4 के वाइस प्रेसिडेंट मनीष वर्मा, वार्ड जनरल सेक्रेटरी राहुल शर्मा, वार्ड सेक्रेटरी अनीश खान सहित सैकड़ों युवाओं ने वार्ड नंबर 9, 29 और 3 से कांग्रेस छोड़कर आप की सदस्यता ग्रहण की।
इस मौके पर डॉ. आहलूवालिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की काम की राजनीति युवाओं में नई उम्मीद जगा रही है और शहर में आप के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से निगम में आप की सरकार बनाने का आह्वान किया।
प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह यादव ने नवयुवकों का स्वागत करते हुए पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। नगर निगम चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले महीनों में सियासी उठापटक और तेज हो सकती है। |
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