160 करोड़ रुपये है यूक्लीन का सालाना टर्नओवर
नई दिल्ली। अकसर लोग कारोबार या पढ़ाई में सफलता के लिए बड़े रिस्क लेते हैं। जैसे कि घर-जमीन बेचना, नौकरी छोड़ना या लोन लेना। मगर आखिर में सफलता मिल जाए, तो इन जोखिमों का दुख नहीं होता, बल्कि खुशी होती है, सही समय पर सही फैसला लेने की। हम आज आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताएंगे, जिसकी सफलता के लिए उसकी मां ने अपने सोने के कंगन बेच दिए। मगर अंत में ये कुर्बानी व्यर्थ नहीं गयी। ये कहानी है बिहार के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले अरुणाभ सिन्हा (Arunabh Sinha Success Story) की।
बेटे की पढ़ाई के लिए बेचे कंगन
अरुणाभ के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इसीलिए उनकी मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए सोने के कंगन बेच दिए। दरअसल अरुणाभ को आईआईटी में एडमिशन लेना था, जिसके लिए अधिक पैसों की जरूरत थी।
पढ़ाई के बाद पहली कंपनी
अरुणाभ को आईआईटी बॉम्बे में एडमिशन मिला। उन्होंने मेटलर्जी और मैटेरियल साइंस में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खुद अपनी पहली कंपनी शुरू की। अरुणाभ ने खुद का पहला स्टार्टअप “फ्रेंग्लोबल“ शुरू किया। मगर उनका स्टार्टअप नाकामयाब रहा।
असफलता के बावजूद अरुणाभ ने हार नहीं मानी और नया वेंचर शुरू करने का फैसला लिया। 2015 में उन्होंने अपनी कंपनी बेच दी और ट्रीबो होटल्स में सीनियर पोजीशन पर काम करने लगे। उस होटल में उनकी सैलरी 12 लाख रुपये प्रति माह थी।
शुरू किया नया बिजनेस
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में काम करते हुए अरुणाभ को लगा कि होटलों में 60 फीसदी शिकायतें लॉन्ड्री से संबंधित होती हैं। यहीं से उन्हें अपना नया लॉन्ड्री बिजनेस शुरू करने का आइडिया मिला। बस फिर क्या था, उन्होंने नौकरी छोड़ी, अपनी पत्नी गुंजन सिन्हा की मदद से UClean नाम का लॉन्ड्री बिजनेस शुरू किया।
शुरू में तो उनके अपने माता-पिता इस बिजनेस आइडिया के खिलाफ थे। मगर अरुणाभ की किस्मत में शायद यहीं सफलता लिखी थी।
क्या है बिजनेस मॉडल?
अरुणाभ का Uclean 24 से 48 घंटे में कपड़े धो और प्रेस करते वापस पहुंचाता है। इसकी सेवाओं में वॉश एंड आयरन, ड्राई क्लीन और स्पेशल केयर शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अरुणाभ की कंपनी का सालाना टर्नओवर 160 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनका कारोबार कई अन्य देशों में भी फैल गया है।
अरुणाभ का सपना है अपने टोटल आउटलेट्स की संख्या को 1000 तक पहुंचाना, जो फिलहाल 800 के आस-पास है।
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