रोते बिलखते परिजन। जागरण
विकास दीक्षित अटल, निघासन, (लखीमपुर)। शनिवार देर रात सिंगाही रोड पर सेमल की लकड़ी से लदे ट्राले से बाइक टकराने से बाइक सवार तीन युवकों मौत हो गई थी, जबकि एक युवक घायल हो गया था। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव रविवार देर शाम गांव पहुंच गए। इससे गांव से लेकर सिंगाही कस्बे में मातम छा गया।
गांव बरोठा में परिवारीजनों ने मृतक विकास का देर शाम जहां अंतिम संस्कार कर दियात तो वहीं सिंगाही निवासी मृतक सुरेश और छोटू के शव गांव पहुंचने पर सुरेश की पत्नी बदहवास हो गई। इसको लेकर परिवारीजनों में चीख पुकार मच गई। दूर दराज रहने वाले रिश्तेदारों के न आ पाने पर दोनों शव का अंतिम संस्कार रविवार सुबह हुआ।
बता दें कि शनिवार रात सिंगाही मार्ग पर सरयू पुल के पास लकड़ी भरे ट्राले से बाइक टकरा गई थी। इसमें बाइक सवार तीन युवकों की जहां मौके पर मौत हो गई थी, तो वहीं एक युवक घायल हो गया था।
टूट गई उम्मीदें, बिखर गया परिवार मरते दम तक निभाई दोनों ने दोस्ती
सुरेश और छोटू की दोस्ती मरते दम तक मिशाल बनी रही। एक साथ उठना बैठना और एक ही दिन दोनों के जनाजे उठे देखकर लोगों की आंंखे नम हो गई। दोनो की एक साथ अर्थी उठने पर परिवारीजनों के अलावा गांव के लोग भी दोनों की दोस्ती के अटूट रिश्ते के पुलिंदे बांध रहे है।
सुरेश और छोटू का याराना इतने शबाब पर था कि रात के समय में भी सुरेश बिना कुछ सोचें समझे छोटू के साथ बाइक पर बैठकर निघासन के लिए निकल पड़ा। हालांकि यह किसी को ज्ञात नहीं था कि अनहोनी उन्हें अपनी ओर खींच रही है। चंद पलो में ही दोनों दोस्त एक साथ मौत की नींद सो गए। मृतक सुरेश की पत्नी पल्लवी बदहवास है और वह अपने मासूम बच्चों को नहीं समझा पा रही है। वहीं बड़े बेटे को खोने के गम से मां भी कराह रही है।
भाई तुम घर आओ, इतने दिनों के बाद आए हो ससुराल मत रुकना
घर से निकलते वक्त छोटू के वो शब्द उस भाई को अंदर अंदर ही खाए जा रहे हैं, जिसे लेने के लिए वह अपने दोस्त के साथ बाइक से निघासन जा रहा था। छोटू का बड़ा भाई दिनेश हिमाचल प्रदेश में मजदूरी करता था। शुक्रवार को वह हिमाचल से घर आ रहा था, तभी छोटू ने फोन कर अपने भाई दिनेश से बातचीत की।
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हालांकि दिनेश ने उसे समझाया कि रात ज्यादा हो गई, अब घर न आकर ससुराल में रुककर सुबह घर आ जाएंगे। मगर, छोटू की जिद के आगे बड़ा भाई भी बौना हो गया। आखिरकार उसने घर आने की हामी भरी। मृतक छोटू के भाई दिनेश ने बताया कि मुझे छोटू के वो शब्द जीवन भर याद रहेंगे। जो मरने से पहले शुक्रवार को उसने कहे थे।
हिमाचल प्रदेश से घर वापस आते वक्त छोटू ने फोन पर बात की। रात हो जाने के कारण छोटू से बताया कि अब घर नहीं ससुराल में ही रुक जाता हूं। भीड़ होते ही घर आ जाऊंगा।उधर से छोटू ने जवाब में कहा कि दादा इतने दिनों के बाद घर आ रहे हो ससुराल मत रुक जाना मैं तुम्हे आ रहा हूं लेने तुम निघासन पहुंचो।उसकी जिद के आगे मै भी खामोश हो गया।बस इतना कहने के बाद ही वह घर से निकल पड़ा।रास्ते में काल के रूप में लकड़ी से लदा ट्राला उसे निगल गया। |