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सबको हंसाने वाले ‘विरजू भाई’ आज रुला गए- आवाज के जादूगर, जिन्हें आकाशवाणी भागलपुर कभी नहीं भूलेगा

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आकाशवाणी के आवाज के जादूगर डॉ. विजय कुमार मिश्र ‘विरजू भाई’ का निधन



द‍िलीप कुमार शुक्‍ला, भागलपुर। आकाशवाणी के मंच से अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज के जरिए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले डॉ. विजय कुमार मिश्र का 22-02-2026 (रव‍िवार) को निधन हो गया। वे पिछले तीन माह से अस्वस्थ चल रहे थे। शुरुआत में उनका इलाज कोलकाता में चल रहा था, कुछ ठीक होने के बाद वे घर लौट आए। रविवार को अचानक उनकी तबीयत और खराब हो गई, जिसे देखते हुए उन्हें तिलकामांझी स्थित डॉ. वीरेन्द्र के क्लिनिक में भर्ती कराया गया। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।   
डिजिटल दुनिया में शोक की लहर

डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन की सूचना इंटरनेट मीडिया पर साझा हुई, इंटरनेट मीडिया पर शोक संवेदनाओं का तांता लग गया। श्रोताओं, प्रशंसकों और शहरवासियों ने उनकी तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग अपने संदेशों और यादों के जरिए उनके व्यक्तित्व और मधुर आवाज़ को याद करने लगे। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोगों ने भावपूर्ण टिप्पणियों के साथ डॉ. मिश्र की यादें ताजा कीं। जिन्हें लोग प्यार से ‘विरजू भाई’ के नाम से जानते थे।
शोक की लहर: शहर और परिवार में गम


डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में शुभचिंतक और शहरवासियों की भीड़ क्लिनिक पहुंच गई। शहर के सांस्कृतिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि अब उनकी मधुर आवाज़ हमारे बीच नहीं रहेगी। उनके निधन से शहर और परिवार दोनों गहरे शोक में डूब गए। डॉ. मिश्र अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियों सहित पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि की तैयारी

सोमवार को डॉ. विजय कुमार मिश्र के के पुत्र-पुत्रियों और अन्य संबंधियों के आगमन के बाद बरारी स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहर के लोगों के लिए यह क्षति अत्यंत दुखद है। परिवार, मित्र और शुभचिंतक उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं। उनके निधन ने भागलपुर के सांस्कृतिक और प्रसारण जगत में एक खालीपन पैदा कर दिया है।
सांस्कृतिक और प्रसारण जगत की अपूरणीय क्षति

कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज, कुंदन बाबा, स्वामी जीवनानंद, विधायक रोहित पांडेय, गीतकार राजकुमार, डॉ. विजय कुमार वर्मा, इंजीनियर कामेश्वर शर्मा, आशुतोष प्रभाकर, ब्रह्म्मदेव मंडल, व‍िरेन्‍द्र कुमार शुक्‍ल, मनीष गूंज, सत्‍यनारायण मंडल, डा मीरा झा, अतुल प्रियदर्शन, मनीष कुमार ठाकुर, डॉ. प्रीति शेखर, द‍िलीप शास्‍त्री सहित कई अन्य लोगों ने शोक जताया।
डॉ. मिश्र की अलग पहचान

डॉ. विजय कुमार मिश्र आकाशवाणी भागलपुर के वरिष्ठ उद्घोषक थे। उनकी आवाज़ ही आकाशवाणी की पहचान बन गई थी। ग्रामजगत कार्यक्रम में उनकी प्रतिभा देखने को मिलती थी। उनकी आवाज इतनी मधुर और प्रभावशाली थी कि श्रोता बिना सुने कार्यक्रम से नहीं हटते थे। डॉ. विजय कुमार मिश्र और सांत्‍वना साह की जोड़ी ग्रामजगत में आज भी याद की जाती है। लोग उन्हें “विरजू भाई” के नाम से जानते थे, जबकि सांतवना साह को “चंपा बहन” के नाम से जाना जाता था।
हेलो फारमाइस और नाट्य योगदान

डॉ. मिश्र ने हेलो फारमाइस कार्यक्रम में अपनी आवाज़ से चार चांद लगाए। उन्होंने नाटकों और फिल्मों में भी अपनी आवाज़ दी और अभिनय किया। उनके योगदान ने आकाशवाणी के कार्यक्रमों की लोकप्रियता और पहचान बढ़ाई। उद्घोषण कला में उनका अद्वितीय योगदान उन्हें विशिष्ट हस्‍ताक्षर बनाता था। जिन कार्यक्रमों में डॉ. मिश्र रहते थे, उनके कार्यक्रमों की गुणवत्ता में चार चांद लग जाते थे।
सरकारी कार्यक्रम और राष्ट्रीय मंच पर योगदान

डा विजय कुमार मिश्र भागलपुर के कई जिलों में सरकारी कार्यक्रमों का संचालन करते थे। उनकी आवाज़ की जादूगरी ने कार्यक्रमों में चार चांद लगा दिए। उन्हें एक बार राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी के कार्यक्रम में संचालन करने का अवसर भी मिला, जो विक्रमशिला विश्वविद्यालय कहलगांव में आयोजित हुआ। उन्होंने कई बार 14 फरवरी को आयोजित मातृ-पितृ कार्यक्रम में संचालन किया। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी उन्होंने कमेंट्री दी। युवा महोत्सव और भागलपुर महोत्सव में भी उन्होंने अपनी आवाज़ से सबको प्रभावित किया था। कव‍ि सम्‍मेलन का भी संचालन करते थे।  
सांस्कृतिक और सामाजिक पोषण

डा व‍िजय कुमार मिश्र केवल उद्घोषक नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के पोषक भी थे। वे भागलपुर और आसपास के क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में खड़े थे। उनके योगदान से स्थानीय कलाकारों और युवाओं में उत्साह और प्रेरणा बढ़ी। उन्होंने सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया और स्थानीय किसानों व समाज के कमजोर वर्गों के लिए पहल की। वे कला व संस्‍कृत‍ि के पोषक थे। डा म‍िश्र अंग क्षेत्र के किसी धरोहर से कम नहीं थे।
डिजिटल दुनिया में शोक की लहर

डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन की सूचना इंटरनेट मीडिया पर साझा हुई, सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं का तांता लग गया। श्रोताओं, प्रशंसकों और शहरवासियों ने उनकी तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग अपने संदेशों और यादों के जरिए उनके व्यक्तित्व और मधुर आवाज़ को याद करने लगे। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भावपूर्ण टिप्पणियाँ और संदेशों की बाढ़ आ गई।
स्थानीय लोगों और कलाकारों की भावनाएँ

डॉ. विजय कुमार मिश्र का जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे सांस्कृतिक और प्रसारण जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन की खबर से शहर के कलाकार, शिक्षक, कवि और श्रोताओं में गहरा शोक है। डॉ. मिश्र का व्यक्तित्व, उनका मधुर संवाद और उनके द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम लोगों की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।
भावनात्मक और सामाजिक योगदान

वे समाज और संस्कृति के संवाहक थे। उनके मार्गदर्शन और अनुभव से कई युवा उद्घोषकों और कलाकारों को प्रेरणा मिली। कला-संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें लोगों के दिलों में और गहरा स्थान दिलाया। उनकी छवि केवल उद्घोषक के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षक के रूप में भी स्थापित हुई।
नवीन पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डा. व‍िजय कुमार मिश्र ने हमेशा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कई उद्घोषक और कलाकारों को प्रशिक्षित किया। उनके अनुभव और संवाद शैली ने नए कलाकारों के लिए मार्गदर्शन का काम किया। उनके योगदान ने आकाशवाणी और सांस्कृतिक जगत में नए मानक स्थापित किए।
अंतिम श्रद्धांजलि और स्मृति

सोमवार को उनके पुत्र-पुत्रियों और परिवारिक सदस्यों के साथ बरारी स्थित श्मशान घाट पर डॉ. विजय कुमार मिश्र को अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके निधन से आकाशवाणी और भागलपुर की सांस्कृतिक दुनिया में शून्य पैदा हो गया है। उनके योगदान और मधुर आवाज़ की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
भागलपुर के सांस्कृतिक और प्रसारण जगत को छोड़ा अनमोल धरोहर

डॉ. विजय कुमार मिश्र की आवाज़ और व्यक्तित्व ने भागलपुर को प्रसारण के क्षेत्र में एक अलग पहचान दी। उनकी स्मृति और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। भागलपुर के श्रोताओं और कलाकारों के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा स्थापित मानक और आदर्श हमेशा याद किए जाएंगे, और उनकी मधुर आवाज़ की गूंज लंबे समय तक लोगों के कानों में सुनाई देती रहेगी।
शोक जताया : शहर और कलाकार

संजय घोष, मनोज मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र, रिंंकू, नीलराज, सरोज वर्मा, अरुण तिवारी, अमित तिवारी, नारायण जी, प्यारे हिंद, डॉ. अमरेन्द्र, डॉ. मनोज मीता, डॉ. सुधीर मंडल, रविशंकर रवि, प्रसून लतांत, सुधीर कुमार प्रोग्रामर, आलोक कुंदन, स्वामी तत्वावधान, डॉ. विवेक कुमार, मधुव्रत चौधरी, अशोक कुमार चौधरी, डॉ. प्रेम चंद पांडेय, कवि मुरारी मिश्र, विद्या वाचस्पति पंडित आमोद कुमार मिश्र, गौतम सब्यशाची, त्रिलोकीनाथ दिवाकर, प्रतीम कुमार विश्वकर्मा, नीतीश हर‍िओम, लोक गायिका अर्पिता चौधरी, अमरदीप शुक्‍ला नटवर सहित अनेक लोगों ने डॉ. विजय कुमार मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। श्रद्धा-सुमन अर्प‍ित कर श्रद्धांजल‍ि दी।
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