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ट्रंप का नया 15% टैरिफ भी होगा खारिज, फिर से कोर्ट में जाने की तैयारी; अब क्या करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति?

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अदालत ने स्पष्ट किया था कि कर लगाने की प्राथमिक शक्ति कांग्रेस के पास है



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 15 प्रतिशत वैश्विक आयात शुल्क लगाने के फैसले पर कानूनी विवाद बढ़ गया है। भारतीय-अमेरिकी वरिष्ठ वकील नील कात्याल ने ट्रंप के नए आदेश पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति व्यापक टैरिफ लगाना चाहते हैं तो उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कांग्रेस की मंजूरी लेनी चाहिए, न कि कार्यकारी शक्तियों का विस्तारवादी इस्तेमाल करना चाहिए।

उनका ये कदम संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और इसे फिर कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कात्याल ने इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि प्रशासन ने इस बार 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का सहारा लिया है, जबकि न्याय विभाग (डीओजे) पहले सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दे चुका है कि व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन घाटा अलग अवधारणाएं हैं। ऐसे में अब धारा 122 के तहत 15 प्रतिशत का वैश्विक इंपोर्ट सरचार्ज उचित ठहराना कठिन होगा।

बता दें कि यह विवाद हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आइईईपीए) के तहत लगाए गए व्यापक आयात शुल्क को अधिकार-सीमा से बाहर बताया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि कर लगाने की प्राथमिक शक्ति कांग्रेस के पास है।

कात्याल का तर्क है कि यदि टैरिफ देशहित में हैं तो कांग्रेस को मनाना कठिन नहीं होना चाहिए, क्योंकि संविधान के अनुसार राजस्व और कराधान का अधिकार विधायिका के पास है। उनका कहना है कि व्यापार घाटे को भुगतान संतुलन संकट के बराबर मानना न तो कानूनी रूप से टिकाऊ है और न ही आर्थिक दृष्टि से उचित।

इस बहस को समर्थन देते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की पूर्व प्रथम उप प्रबंध निदेशक और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी कात्याल के तर्कों का अनुमोदन किया। उन्होंने टिप्पणी की कि यह “इंटरनेशनल इकोनामिक्स 101\“\“ का मामला है, जहां दोनों घाटों के बीच बुनियादी अंतर को समझना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत पहले 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ घोषित किया, जिसे अधिकतम 150 दिनों तक लागू किया जा सकता है। बाद में राष्ट्रपति ने इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया और इसे पूरी तरह अनुमत और कानूनी रूप से परखा गया बताया।

(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
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