फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने की सिफारिशों पर कमेटी ने लगाई मुहर।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। प्रशासन ने उद्योगपतियों को बड़ी राहत देने की ओर कदम बढ़ाया है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) दोगुना होगा और फेज-3 में 2.20। डीसी के नेतृत्व में गठित कमेटी ने सिफारिशों पर अपनी मुहर लगा दी है।
कमेटी की ओर से रिपोर्ट अगले सप्ताह मुख्य सचिव को सौंप दी जाएगी। मुख्य सचिव के बाद रिपोर्ट प्रशासक को भेजी जाएगी। प्रशासक से मंजूरी मिलते ही इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में एफएआर का एरिया 0.75 से बढ़ाकर 1.50 किया जा सकेगा। फेज-3 में 2.20 की अनुमति मिल जाएगी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सेंट्रल कोर्टयार्ड (एरिया खाली रखने) की अनिवार्यता समाप्त करने की भी सिफारिश की है। कामर्शियल प्लाॅट्स में अनिवार्य केंद्रीय आंगन की व्यवस्था को हटाकर आगे और पीछे सेटबैक (खुली जगह) का प्रविधान रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इससे जिन उद्योगपतियों के खिलाफ मिसयूज और वाॅयलेशन के नोटिस लंबित हैं वह भी खत्म हो जाएंगे।
मोहाली और पंचकूला में 3 तक है एफएआर
मोहाली, पंचकूला, डेराबस्सी, बरवाला और बद्दी में एफएआर 2.5 से 3 तक है। ऐसे में चंडीगढ़ में एफएआर बढ़ाने की राहत मिलने पर एक तो फेज-3 का विकास हो पाएगा और दूसरा उद्योगपतियों को पंचकूला और मोहाली की तरह राहत मिल जाएगी।
इस समय एफएआर का शहर में एक बड़ा मुद्दा है। प्रशासन की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में नए प्लाॅट बेचने के लिए ई-नीलामी भी अप्रैल से शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रशासन के अनुसार फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ने से जो प्लाॅट इस समय बिक भी नहीं रहे हैं वह भी नीलाम हो जाएंगे। इस समय प्रशासन का पूरा फोकस फेज-3 को विकसित करने पर है।
ज़ोनिंग पैरामीटर लागू करने का प्रस्ताव
कमेटी ने दो कनाल तक के प्लाॅट्स के लिए आर्किटेक्चरल कंट्रोल की जगह जोनिंग पैरामीटर लागू करने का प्रस्ताव बनाया है। कमेटी का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक प्लाॅट्स में भूमि की बर्बादी को कम करना रहा।
अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय आंगन की अवधारणा पहले प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन और लोडिंग-अनलोडिंग के लिए बनाई गई थी, लेकिन आधुनिक तकनीक और बदलते औद्योगिक स्वरूप के चलते इसकी उपयोगिता अब कम हो गई है।
विशेषकर सर्विस सेक्टर के बढ़ने से केंद्रीय आंगन उद्योगों के विस्तार में बाधा बन गया है। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में 5 मरला से लेकर बड़े प्लाट्स तक मौजूद हैं। फेज-2 में 95 प्रतिशत प्लाट एक कनाल तक के हैं, जबकि फेज-1 में यह संख्या करीब 35 प्रतिशत है। |
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