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Samastipur agriculture : गुड़ उत्पादन में पूसा गन्ना अनुसंधान केंद्र की बनेगी वैश्विक पहचान

LHC0088 3 hour(s) ago views 727
  

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।  



पूर्णेंदु कुमार, पूसा (समस्तीपुर) । डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा स्थित गन्ना अनुसंधान केंद्र को गुड़ की मिठास के लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाया गया है।

बिहार में उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ का उत्पाद सुनिश्चित करने के लिए गन्ना अनुसंधान संस्थान, पूसा को केंद्र सरकार ने पांच करोड़, 69 लाख, 65 हजार रुपये की मंजूरी दी है। पहले साल के लिए केंद्र सरकार ने एक करोड़, 31 लाख की राशि भी जारी कर दी है।

इससे केंद्र पर विश्वस्तरीय अनुसंधान की व्यवस्था होगी। देश-विदेश के विज्ञानी यहां प्रशिक्षण लेने आएंगे। जिले की 10 हजार 248 हेक्टेयर भूमि पर सात लाख 61 हजार 436 टन गन्ना उत्पादन होता है।

इस बीच ईंख अनुसंधान केंद्र के छह प्रभेदों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है। इसमें सीओपीयू 22436, सीओपीयू 22437, सीओपीयू 22439, सीओपीयू 22440, सीओपीयू 22441 एवं सीओपीयू 42 हैं।

सीओपीयू 18437 को बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल एवं असम के लिए चिह्नित किया गया है। इस पहल से बिहार में उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ उत्पादन को नई दिशा मिलेगी और राज्य को देश में गुड़ उद्योग के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान प्राप्त होगी।  
आधुनिक तकनीक से गुड़ उद्योग को बढ़ावा

केंद्र के निदेशक डा. देवेंद्र सिंह बताते हैं कि संस्थान को गुड़ उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आधुनिक मशीन व तकनीक से गुणवत्ता युक्त गुड़ एवं उससे जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

साथ ही, गुड़ आधारित लघु उद्योगों के लिए प्रशिक्षण देकर उद्यमियों को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा। गुड़ के विभिन्न उत्पादों में सफेद मूसली, गिलोय, सोंठ एवं अश्वगंधा जैसे औषधीय तत्वों का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे गुड़ को औषधीय रूप दिया जा सके।  
टिश्यू कल्चर लैब को उन्नत करने की योजना

राज्य सरकार ने संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिट्टी जांच प्रयोगशाला विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसपर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के अवर मुख्य सचिव के. सेंथिल ने विश्वविद्यालय से 100 बेड के छात्रावास निर्माण का अनुरोध किया है। इसमें प्रशिक्षण हाल, संगोष्ठी कक्ष एवं कैटरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसकी राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।

टिश्यू कल्चर लैब को उन्नत कर प्रतिवर्ष पांच लाख पौधों का उत्पादन करने की योजना है। विश्वविद्यालय को राज्य भर में गन्ना के नाभिकीय बीज, प्रजनक बीज एवं आधार बीज के विस्तार स्तर पर उत्पादन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।  
10,248 हेक्टेयर भूमि पर हो रही गन्ने की खेती

बिहार में उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ के उत्पादन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूसा स्थित गन्ना अनुसंधान संस्थान को बिहार राज्य सरकार ने पांच करोड़ 69 लाख 65 हजार रुपये की मंजूरी दी है।

वहीं, पहले वर्ष के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक करोड़, 31 लाख रुपये भी जारी कर दिए गए हैं। इस वित्तीय सहयोग से संस्थान में विश्वस्तरीय अनुसंधान सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

आधुनिक प्रयोगशाला, उन्नत उपकरण एवं वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण गुड़ उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में वर्तमान में 10,248 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती हो रही है, जहां से प्रतिवर्ष लगभग 7,61,436 टन गन्ना उत्पादन होता है।
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