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होली से पहले मिलावटखोर एक्टिव, सेहत को पहुंच सकता है नुकसान; इस तरह करें खुद पहचान

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कार्रवाई के नाम पर सख्त कार्रवाई न होने से बुलंद होते हैं मिलावटखोरों के हौसले। प्रतीकात्मक



सुमित थपलियाल, देहरादून। त्योहारों पर अक्सर खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट की संभावना आमजन की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। अब होली के दिन जैसे नजदीक आ रहे हैं, मिलावटखोरों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।

हर वर्ष मिलावटखोर पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई करने वाला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से अभी तक विस्तृत एसओपी जारी नहीं हुई। ऐसे में मिलावटखोरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़े इसे नकारा नहीं जा सकता। हालांकि अधिकारी जगह-जगह लोगों को मिलावट पर अंकुश लगाने को जागरूक कर रहे हैं।

होली से पहले दून में एक बार फिर मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। अधिक लाभ कमाने की लालच में कुछ कारोबारी लोगों की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। अधिकतर मावा, दूध, पनीर, तेल, रिफाइंड, मसाले, आटा और मिष्ठान आदि ऐसी कोई खाद्य सामग्री बची हो, जिसमें मिलावट न हो रही हो।

दूसरी ओर, कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभाग सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित दिखाई देता है। यही कारण है कि मिलावटखोरों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। हर त्योहार से पहले प्रशासन की नींद टूटती है, कुछ दिन छापेमारी होती है और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है।

इम्यून सिस्टम को नुकसान
त्योहार पर मिलावटी दूध, मिठाई और चांदी वर्क के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जाता है। राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. विवेकानंद सत्यवली के अनुसार, मिलावटी मिठाई व कैमिकल युक्त रंग के इस्तेमाल गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। मिलावटी खाना शरीर को धीरे-धीरे अंदर से कमजोर करता है, इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। पेट दर्द, गैस, दस्त, सूजन, फूड प्वाइजनिंग, लिवर की परेशानी बढ़ जाती है।

मुनाफा के चक्कर में डालते हैं सिंथेटिक कलर
मिठाई की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार के अनुसार, जो खाद्य कलर आता है वह काफी महंगा होता है। इसलिए त्योहार के समय कुछ लोग मिठाई में सस्ता कलर डालते हैं। जो खाद्य कलर से 20 प्रतिशत तक सस्ता मिल जाता है। पैसा बचाने के चक्कर में मिष्ठान में यही कलर डालते हैं। जो सेहत बिगाड़ता है।

इस तरह करें मावा और तेल की पहचान

  • स्पेक्स के संस्थापक डा. बृजभूषण शर्मा के अनुसार, गुझिया के लिए सबसे ज्यादा मावा की खरीदारी होती है। जिसे लोग होली से दो हफ्ते पहले तैयारी कर लेते हैं।
  • मावा खरीदते समय एक चुटकी हाथ में रगड़ दें। चिकना लगे, प्राकृतिक तेल महसूस हो, और दानेदार हो तो समझ लें की ठीक है।
  • थोड़ा मावा गर्म पानी में डोलें और चुटकीभर हल्दी व चीनी डाल दें। मावा गुलाबी है तो खराब है।
  • सरसों के तेल में हल्का नींबू डालें और हिला दें, यदि उसकी भौतिक स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव दिखता है तो यह सही नहीं है।



इन बातों का रखें ध्यान, शिकायत के लिए करें संपर्क

  • सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा देहरादून मनीष सयाना के अनुसार, हमेशा साफ सफाई वाले खाद्य प्रतिष्ठानों से ही सामान क्रय करें।
  • एफएसएसएआइ से पंजीकृत/ लाइसेंस दुकानों से सामान क्रय करें।
  • दूध एवं दुग्ध पदार्थ क्रय करने से पूर्व उसके रखने की स्थिति को देखें कि तापमान को नियंत्रित किया गया है अथवा नहीं।
  • अधिक चटक रंग वाली मिठाई न खरीदें।
  • प्रिंट पेपर में खाद्य पदार्थों को क्रय न करें।
  • बीमार/अस्वस्थ व्यक्ति से खाद्य पदार्थ क्रय न करें।
  • हेड कैप, ग्लब्ज आदि पहने व्यक्ति से खाद्य पदार्थ क्रय करने को प्राथमिकता दें।
  • खुले में विक्रय करने वाले खाद्य पदार्थ को न खरीदे। पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदने से पूर्व उसके लेबल पर एफएसएसएआइ नंबर, पैकिंग तिथि, कालातीत तिथि देखकर ही खरीदें।
  • खाद्य सुरक्षा की जानकारी/शिकायत के लिए टोल फ्री नम्बर 18001804246 पर संपर्क करें।


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