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नोटिस के बाद पूर्व जत्थेदार व एसजीपीसी के बीच टकराव तेज; भ्रष्टाचार के आरोपों पर मांगा जवाब, दी खुली चेतावनी

deltin33 9 hour(s) ago views 850
  

श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार व श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह।  



जागरण संवाददाता, अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा जारी 72 घंटे के नोटिस पर ज्ञानी रघबीर सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संस्था को चुनौती देते हुए कहा कि पहले उनके उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाए, अन्यथा वे सभी तथ्यों और दस्तावेजों को संगत के सामने सार्वजनिक करेंगे।

ज्ञानी रघबीर सिंह, जो श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार और श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी रह चुके हैं, ने बताया कि 18 तारीख को जालंधर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने एसजीपीसी के भीतर कथित भ्रष्टाचार के गंभीर मुद्दे उठाए थे। इसके अगले दिन कार्यकारी बैठक में उन्हें 72 घंटे का नोटिस जारी कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस नोटिस की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली, क्योंकि उस समय वे पंजाब से बाहर थे। उनका आरोप है कि संस्था के भीतर जिन मामलों पर स्वयं एसजीपीसी प्रधान संगत से माफी मांग चुके हैं, उन पर सवाल उठाने वालों को नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।

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भ्रष्टाचार रोकना हमारी पंथक जिम्मेदारी ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा- “भ्रष्टाचार रोकना और सच सामने लाना हमारी पंथक जिम्मेदारी है। हमारी मांग है कि 72 घंटे के भीतर हमारे सवालों का जवाब दिया जाए। यदि जवाब नहीं मिला तो हम हर तथ्य संगत के सामने रखेंगे।” उन्होंने दावा किया कि उनके पास सभी आरोपों से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण मौजूद हैं।



उन्होंने संदेश में जोर देकर कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पंथक संस्थाओं की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है।

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इन मुद्दों को ज्ञानी रबघीर सिंह ने उठाया था

प्रेस वार्ता में ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी की जमीनों की बिक्री में पारदर्शिता की कमी, लंगर की सूखी रोटियों की बिक्री में कथित गड़बड़ी और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के गुम होने के मामले को गंभीर बताया। उन्होंने इन मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को जारी अकाल तख्त के हुक्मनामे का हवाला देते हुए जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंथक हलकों में बहस तेज हो गई है।  

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