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अगले वर्ष काम पूरा होने के साथ ही संचालन की संभावना. Concept
जागरण संवाददाता, चंपावत । सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले वर्ष से मां पूर्णागिरि दर्शन के लिए महिला व बुजुर्गों को अधिक पैदल चलने की आवश्यकता नहीं होगी।
रोपवे निर्माण होने के बाद हर सात मिनट में एक ट्राली का आवागमन होगा। जिसकी क्षमता 65 श्रद्वालुओं की होगी। बताया जा रहा है कि इस सुविधा के बाद हर घंटे करीब 800 श्रद्धालु मां के दरबार मेंं पहुचेंगे। इससे महिला, बुजुर्ग व बच्चों के लिए सहूलियत मिलेगी।
मां पूर्णागिरि में अगाध आस्था के चलते यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। उच्च पर्वतीय चोटी पर माता के विराजमान होने के चलते कई सीढ़ियों का सहारा लेना होता है। ऐसे में कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को खासकर परेशानी होती है। इसलिए यहां रोपवे बनाने की कवायद पिछले तीन वर्षों से चल रही थी, लेकिन अब जाकर रोपवे निर्माण को लेकर अब सकारात्मक कार्य नजर आ रहा है।
दिल्ली की कार्यदायी संस्था केआर आनंद कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की ओर से करीब 50 करोड़ की लागत से निर्माण किया जा रहा है। छह किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ 950 मीटर में तय होगी। यानी कि रोपवे की कुल लंबाई 950 मीटर होगी।
इसमें एक साथ दो ट्रालियां संचालित होंगी। प्रत्येक ट्राली में एक समय में 65 श्रद्धालु सवार हो सकेंगे। यह रोपवे एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक लगभग 250 मीटर की ऊंचाई को मात्र सात मिनट में पार करेगा, जिससे प्रति घंटे 800 से अधिक श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।
रोपवे के संचालन से हनुमानचट्टी से काली मंदिर तक का लगभग छह किलोमीटर का पैदल एवं सड़क मार्ग कम हो जाएगा, जिससे विशेषकर वृद्धजन, महिलाएं एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। कार्यदायी संस्था को अगले वर्ष तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। जिसके सापेक्ष अब तक 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
कार्यदायी संस्था को अगले वर्ष काम पूरा कर हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऐसे में समय के साथ ही गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। कार्य तेजी से हो रहा है। - मनीष कुमार, जिलाधिकारी, चंपावत
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