प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। रामपुर की गदईया ग्राम पंचायत में तैनात सफाईकर्मी द्वारा जेल में निरुद्ध रहने की सूचना विभाग से छिपाकर वेतन लेने के मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त विकास आयुक्त ने जांच बैठा दी है हालांकि जिला पंचायत राज अधिकारी रामपुर ने कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। अब मंडल स्तर से फर्जी उपस्थिति प्रमाणित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी तय है।
मामला रामपुर की तहसील मिलक क्षेत्र के राजस्व ग्राम गदईया में तैनात सफाईकर्मी महेन्द्रपाल उर्फ पप्पू का है। शिकायतकर्ता आदेश शंखधार निवासी असदुल्लापुर ने 12 दिसंबर 2025 को खंड विकास अधिकारी मिलक को भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सफाईकर्मी वर्ष 2016 में एक आपराधिक मुकदमे में जेल जा चुके हैं, लेकिन इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी गई।
2016 में कोर्ट में किया था आत्मसमर्पण
जांच में सामने आया कि थाना पटवाई में दर्ज मुकदमे के तहत महेन्द्रपाल ने 18 अक्टूबर 2016 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें जिला कारागार रामपुर में भेजा गया। वह करीब नौ दिन तक जेल में निरुद्ध रहा। सेवा नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी को हिरासत या जेल जाने की सूचना तत्काल विभाग को देना अनिवार्य होता है।
आरोप है कि सफाईकर्मी ने ग्राम पंचायत, विकास खंड या जिला स्तर पर इसकी सूचना नहीं दी। इतना ही नहीं, जांच में यह तथ्य सामने आया कि जेल में रहने की अवधि के बावजूद अक्टूबर 2016 माह का पूरा वेतन आहरित कर दिया। प्रकरण गंभीर होने पर संयुक्त विकास आयुक्त, मुरादाबाद मंडल अरुण कुमार सिंह ने मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए उपनिदेशक (पंचायत) से विस्तृत आख्या तलब की है।
नोटिस जारी कर मांगा गया जवाब
पत्र में पूछा गया है कि जेल अवधि के दौरान सफाईकर्मी की उपस्थिति किस कर्मचारी ने प्रमाणित की, फर्जी उपस्थिति दर्शाकर वेतन निकलवाने में कौन जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे, पर्यवेक्षणीय दायित्व निभाने में लापरवाही बरतने वाले सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) पर क्या कार्रवाई हुई? मंडल स्तर से स्पष्ट नाम व पदनाम सहित रिपोर्ट एक सप्ताह में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके पंचायती राज विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। जिला पंचायत राज अधिकारी, रामपुर द्वारा कर्मचारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत महेन्द्रपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा तथा यह प्रमाणित करना होगा कि वह किसी अन्य रोजगार में संलग्न नहीं हैं।
जांच अधिकारी नियुक्त, विभागीय कार्रवाई तेज
मामले की विस्तृत जांच के लिए विकास खंड शाहबाद के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को जांच अधिकारी नामित किया है। साथ ही निलंबन अवधि में सफाईकर्मी को विकास खंड मिलक कार्यालय से संबद्ध किया है। अब जांच का दायरा केवल कर्मचारी तक सीमित न रहकर फर्जी उपस्थिति और निगरानी तंत्र की जवाबदेही तक पहुंच गया है, जिससे पंचायत विभाग में कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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