ठोस कचरा प्रबंधन की विफल व्यवस्था के विरुद्ध राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है।
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। प्रदेशभर में अवैध कचरा डंपिंग और ठोस कचरा प्रबंधन की विफल व्यवस्था के विरुद्ध राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरण कानूनों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकता, इसे जमीन पर लागू करना अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन प्रभावी और स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया।
लापरवाही पर कार्रवाई
इस पर अधिकरण ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि औपचारिकताओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबदेही तय होगी। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है और उसका दायित्व है कि वह पर्यावरण नियमों को सख्ती से लागू कराए। लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकती है।
समस्या व्यापक स्तर पर
एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार अवैध कचरा डंपिंग के मामलों में 7705 चालान किए गए और 63.19 लाख का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया, जिसमें से अधिकांश राशि की वसूली भी हो चुकी है। विभिन्न निकायों और विभागों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह दर्शाता है कि समस्या व्यापक स्तर पर फैली हुई थी और लंबे समय से प्रभावी निगरानी का अभाव था।
पूरे हरियाणा में ऐसी है समस्या
बता दें कि एनजीटी ने यह निर्देश खरखड़ा के रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने दिए हैं। बता दें कि खरखड़ा के रहने वाले व्यक्ति ने धारूहेड़ा स्थित खेल स्टेडियम के सामने अवैध रूप से कचरा डालने को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि समस्या केवल एक स्थान की नहीं बल्कि पूरे हरियाणा की है।
मौलिक अधिकार का हनन
सड़कों, नालों, ग्राम पंचायत भूमि, तालाबों, नहरों और अन्य सरकारी जमीनों पर खुलेआम कचरा डाला जा रहा है। अधिकरण ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह नागरिकों के स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीने के मौलिक अधिकार का हनन है।
कचरा डालने पर हर बार लगेगा अलग-अलग जुर्माना
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अब पूरे प्रदेश में यदि कोई ग्राम पंचायत, नगर परिषद, सरकारी विभाग या व्यक्ति सार्वजनिक अथवा सरकारी भूमि पर कचरा डालता है, तो पहली बार पांच हजार, दूसरी बार 10 हजार और गंभीर उल्लंघन पर 25 हजार या उससे अधिक का पर्यावरण मुआवजा लगाया जाएगा।
तय समय में राशि जमा न करने पर इसे भूमि राजस्व की तरह वसूला जाएगा। अधिकरण ने सभी संबंधित विभागों को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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