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दरऊ आलिम हत्याकांड: अवैध हथियार सप्लाई में सामने आया भाजपा नेता का नाम, तनाव जारी

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दरऊ के ग्राम प्रधान पति पूर्व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष का नाम दंगे में आने पर गर्मा गई किच्छा की राजनीति। प्रतीकात्मक



जागरण संवाददाता, रुद्रपुर । आलिम हत्याकांड में आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद भी दरऊ में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा था। अंदर खाने कुछ न कुछ पक रहा था। बरेली में हुए दंगे में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा पूर्व जिलाध्यक्ष व ग्राम प्रधान पति गफ्फार खान का नाम सामने आने के साथ ही उसको हथियारों की सप्लाई की बात सामने आना अंदर खाने किसी बड़ी घटना की तैयारी का संकेत कर रहा है।

18 अगस्त को ग्राम दरऊ में पुराने विवाद के चलते आलिम खान पुत्र अकरम खान की गोली मार कर हत्या का दी गई थी। हत्या से पहले दोनों पक्षों में पंचायत चल रही थी। पंचायत में विवाद बढ़ा और उसके बाद दरऊ गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज गया था। लोग अपनी दुकानें बंद कर वहां से भागने को मजबूर हो गए थे।

आलिम की हत्या मामले में जहां स्वजन ने मृतक आलिम के पिता अकरम खां व रेहान खां के परिवारों के बीच विवाद को कारण बताया था। परंतु बाद में मामले को राजनीतिक रंजिश से जोड़ते हुए तीन प्राथमिकी पंजीकृत करवाई गई थी, जिसमें तीस से अधिक लोगों को नामजद किया गया था। इस दौरान भी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा पूर्व जिलाध्यक्ष गफ्फार खान पर आलिम की हत्या को राजनीतिक रंग दे विरोधियों को जेल भिजवाने का आरोप लगातार लगता रहा। पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा होने के कारण वह अपने मकसद में कामयाब होता दिखा।

गुरुवार को उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के बहेड़ी कोतवाली अंतर्गत उत्तराखंड को अवैध शस्त्रों की सप्लाई देने जा रहे गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके पास से पांच पिस्टल सहित 315 व 12 बोर के तमंचे व भारी मात्रा में कारतूस बरामद होने का कनेक्शन दरऊ के ग्राम प्रधान पति व पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के साथ जुड़ा तो एक बार फिर दरऊ के आलिम हत्याकांड की यादें ताजा हो गईं।

अवैध असलहा के साथ पकड़े गए आरोपित बहेड़ी कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर इशरत अली खां के सहयोगी हैं और इशरत अली का सगे भाई फराहत अली को बरेली पुलिस ने दंगे के दौरान मौलाना तौकिर रजा के साथ गिरफ्तार किया था। तब से वह दंगे के दौरान सप्लाई किए गए असलहा की आपूर्ति को लेकर बरेली पुलिस की रडार पर था। असलहा बरामद होने पर उसने स्पष्ट कहा कि वह उसे दरऊ के ग्राम प्रधान पति गफ्फार खान को देने जा रहा था। वहीं किच्छा पुलिस हथियारों की आपूर्ति को लेकर पूरी तरह से अंजान बनी रही। जिससे किच्छा पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में बनी हुई है।  
जमानत के बाद बड़ा कांड होने की थी चर्चाएं

आलिम हत्याकांड सिर्फ एक घटना नहीं थी, इससे पूर्व दोनों पक्ष कई बार आमने सामने आए। घटना से तीन दिन पूर्व ही आलिम की हत्या में जेल गए दूसरे पक्ष ने भी अपने ऊपर फायरिंग कर जान से मारने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी पंजीकृत करवाई थी। उसके बाद भी पुलिस ने कड़ा रुख नहीं अपनाया और घटना के तीसरे दिन ही आलिम की हत्या के बाद माहौल गर्मा गया।

पुलिस ने मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर भले जेल भेज दिया, परंतु गफ्फार खान ने इसे राजनीतिक रंग देकर हत्याकांड को नया मोड़ दे दिया था। जिसके बाद दरऊ में इस बात को लेकर चर्चा का बाजार गर्म था कि हत्यारोपितों की जमानत होने के बाद एक बार फिर दरऊ में गोलियां तड़तड़ाएंगी। बरेली में पकड़े गए हथियारों का जखीरा भी दरऊ में चल रही चर्चाओं को हवा देता दिखाई दे रहा है।
दरऊ में पुलिस चौकी की घोषणा कर भूल गए उच्चाधिकारी

पुलिस के उच्चाधिकारी दरऊ के संवेदनशील क्षेत्र होने के साथ ही लगातार राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को लेकर चर्चाओं में रहने वाले दरऊ के प्रति संवेदनहीन बने रहे। दरऊ में सरेआम हुई फारयिंग की घटना में युवक की हत्या के बाद माहौल गर्माया तो तात्कालीन एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने वहां पर पुलिस चौकी खोलने का एलान किया।

समय गुजरने के बाद चौक की स्थापित करने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जबकि दरऊ में लगातार कभी भी किसी बड़ी घटना को लेकर चर्चाएं बनी हुई थीं। परंतु पुलिस को उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित दरऊ के प्रति उदासीनता का रुख लगातार जारी रहा। जबकि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नशा तस्करी को लेकर भी दरऊ हमेशा सुर्खियों में बना रहा है।
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