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जेई दंपती फांसी मामला: अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा था गिरोह, वीडियो बेंच कर कमाते थे रुपये

deltin33 3 hour(s) ago views 973
  



जागरण संवाददाता, चित्रकूट। नाबालिगों के यौन शोषण और उनके वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचने का मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा मिला था। सीबीआइ ने इनके तार दिल्ली और सोनभद्र से जुड़े पाए थे। सितंबर में अनपरा निवासी इंजीनियर नीरज यादव को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई थी और उसके घर से भी आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। दिल्ली में रहकर नौकरी कर रहे नीरज ने आनलाइन आपत्तिजनक लिंक साझा किए जाने के बाद एजेंसियों की नजर उस पर पड़ी थी।

सीबीआइ टीम पहली बार एक नवंबर की रात चित्रकूट पहुंची। यहां उत्तर प्रदेश पर्यटक आवास गृह में ठहरकर चार नवंबर तक छानबीन की और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर आगे की रणनीति बनाई। इसके बाद टीम 16 नवंबर को दोबारा आइ और साक्ष्य जुटाकर आरोपित रामभवन को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित ने कर्वी नगर के शोभा सिंह का पुरवा (एसडीएम कालोनी) स्थित किराये के मकान को अड्डा बना रखा था, जिसमें वह पत्नी दुर्गावती के साथ रहता था। यहां पर चित्रकूट, बांदा, महोबा और हमीरपुर के 50 से अधिक बच्चों के शोषण के आरोप सामने आए थे। मामले की गंभीरता के बावजूद शुरुआत में कोई खुलकर सामने आने को तैयार नहीं था।


जेई की गिरफ्तारी के करीब डेढ़ माह बाद 28 दिसंबर 2020 को सीबीआइ ने उसकी पत्नी दुर्गावती को भी गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वह गवाहों को धमकाने, लालच देकर बयान बदलवाने और पति के अपराधों को छिपाने की कोशिश कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद उसे बांदा की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। दुर्गावती के खिलाफ पाक्सो एक्ट की धारा 17 और आइपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत कार्रवाई की गई थी।

पांच से 16 वर्ष के बच्चों को बनाता था निशाना


जांच में सामने आया कि आरोपित पांच से 16 वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल, उपहार और रुपये का लालच देता था। बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों का उपयोग अवैध सामग्री तैयार और संग्रहीत करने में किया जाता था। डिजिटल जांच में पाया गया कि वह ईमेल और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से देश-विदेश के संदिग्ध लोगों से जुड़ने की कोशिश करता था।
2009 में मिली थी नौकरी

बांदा के नरैनी निवासी रामभवन ने प्राथमिक शिक्षा नरैनी में प्राप्त की। हाईस्कूल राजकुमार इंटर कालेज से तथा पालिटेक्निक की पढ़ाई बांदा से की। वर्ष 2009-10 में उसे नौकरी मिली। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उसका लखनऊ, दिल्ली और प्रयागराज आना-जाना रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी दौरान उसका संपर्क संदिग्ध नेटवर्क से हुआ और रुपये के लालच में वह अपराध के रास्ते पर चला गया।
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